देहरादून। भाजपा संगठन के मुखिया की दौड़ में जिस तरह बंशीधर भगत ने बाजी मारी, उससे हर कोई हैरान है। इन दिनों भाजपा का परचम फहरा रहा है तो प्रदेश अध्यक्ष की दौड़ में दावेदारों की कतार लाजिमी तौर पर लंबी होनी ही थी।
सियासी तजुर्बे के लिहाज से अत्यंत वरिष्ठ भगत के सादगीभरे व्यक्तित्व का एक पहलू और भी है। वह रामलीला में राजा दशरथ का किरदार निभाते हैं। अब संगठन मुखिया पद पर राजा दशरथ की ताजपोशी हो गई तो सियासी हलकों में एक दिलचस्प सवाल गूंज रहा है। वह यह कि अब वनवास किसे भुगतना पड़ेगा। न चाहते हुए भी अपने वचन से बंधे राजा दशरथ को भगवान राम को वनवास पर भेजना पड़ा था। कहीं ऐसा न हो कि भगत जी ने भी किसी से कमिटमेंट किया हो और वह अब ताजपोशी के बाद किसी पर भारी पड़ जाए।
इन दिनों सूबे की सियासत का सबसे हॉट टापिक है मंत्रिमंडल का विस्तार। सब की नजरें मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत पर टिकी हैं कि उनकी नजर ए इनायत आखिर किस पर होती है। मंत्रिमंडल में तीन स्थान खाली हैं। मुखिया जी भी गहरी पसोपेश में हैं कि किसे अपनी टीम में मौका दें।
पांच पूर्व मंत्री, अब इनमें से एक संगठन में चले गए यानी चार रह गए, तो हैं ही, इनके अलावा 40 से ज्यादा विधायक भी अपना नंबर लगने की उम्मीद पाले बैठे हैं। मुख्यमंत्री खुद कह चुके हैं कि अब पद भरने की जरूरत महसूस होने लगी है।
उस पर संगठन के नए मुखिया भी चाहते हैं कि जल्द से जल्द खाली पड़ी कैबिनेट बर्थ विधायकों को आवंटित कर दी जाएं। अब देखना यह है कि वे तीन किस्मत वाले कौन होंगे, जिन्हें तीन साल बाद ही सही, सत्ता सुख तो मिलेगा।











