“प्रतिदिन की शुरुआत योगा प्राणायाम के साथ ” स्वस्थ जीना है तो, योग प्राणायाम प्रतिदिन करना ही होगा

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“प्रतिदिन की शुरुआत योगा प्राणायाम के साथ ” स्वस्थ जीना है तो, योग प्राणायाम प्रतिदिन करना ही होगा,एक दिन क्यों?”ये सवाल हर बीमार शरीर का है,हर थके मन का है,हर उस मां-बाप का है जो बच्चों को तंदुरुस्त देखना चाहते है,सर्वप्रथम बच्चे की योगगुरु मां है,फिर स्कूल है,फिर उसको खुद ही अपनी जिंदगी में योग को प्राथमिकता देनी होगी,क्योंकि बिना योग के स्वस्थ जीवन की कल्पना भी बेनामी है,बच्चे के जीवन में दवा बाद में आती है,पहले मां की गोद,फिर पिता की अंगुली, फिर स्कूल आता है,चटाई आती है,जिस घर में सुबह कांसे के लोटे का पानी पिया जाता हो, और अनुलोम-विलोम होता हो,उस घर में दवाई की शीशी नहीं खुलती,भाषा शरीर की आत्मा है,और योग स्वस्थ शरीर की पहचान,हिन्दी और योग हमारे जीवन की सर्वप्रथम आवश्यकता है, हिन्दी बोलेंगे तो भारत जगेगा,योग करेंगे तो हर मनुष्य स्वस्थ रहेगा,आज से हमारा संकल्प:,नींद खोलें तो सबसे पहले लंबी सांस लें,सूरज को देखकर सूर्य नमस्कार करें,बच्चों को पहले जल पिलाएं,फिर अभिवादन करना और प्राणायाम योग सिखाए,मोबाइल से दूर रखें,स्कूल में शिक्षा का प्रारंभ भी योगा और प्राणायाम से ही हो,तब बीमारियों का अंत होगा और अस्पतालों में,बीमारों की संख्या भी कम होगी।और मेरा भारत योगी और निरोगी होगा, 🇮🇳
“जहाँ योग है, वहाँ रोग नहीं”
जहाँ हिन्दी है,वहाँ हीनभाव नही, हिन्द भावना होगी,✊ जय हिन्द,जय भारत,वन्देमातरम* 🪔 संघर्ष, विकास, संकल्प,’धीर सिंह ‘