“संवाद राष्ट्र निर्माण की साधना हो” – मुकुल कानितकर

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नारद जयंती पर विश्व संवाद केंद्र ने किया पत्रकारों का सम्मान, ‘हिमालय हुंकार’ विशेषांक और ‘गंगा गाथा’ पुस्तक का विमोचन
हरिशंकर सिंह, संवाददाता

देहरादून, “वर्तमान समय संवाद और संचार का युग है, लेकिन संवाद तभी सार्थक होता है जब उसमें राष्ट्रीयता का भाव और गहन विवेक जुड़ा हो।” यह विचार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की प्रचार टोली के अखिल भारतीय संयोजक मुकुल कानितकर ने रविवार को विश्व संवाद केंद्र, देहरादून द्वारा आयोजित नारद जयंती एवं पत्रकारिता दिवस समारोह में मुख्य वक्ता के रूप में व्यक्त किए।

मेडिकल कॉलेज सभागार में आयोजित इस भव्य समारोह में श्री कानितकर ने कहा कि संवाद का उद्देश्य राष्ट्र को सुदृढ़ करना होना चाहिए, न कि केवल सनसनी फैलाना। उन्होंने महाभारत और रामायण के प्रसंगों के माध्यम से बताया कि संवाद किस प्रकार समाज की दिशा तय करता है।

उन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का उदाहरण देते हुए कहा कि कई बार अधूरी जानकारी के आधार पर प्रसारित खबरें देशहित को नुकसान पहुँचा सकती हैं। “समाचारों को सत्यापित करना और उचित समय पर संवाद स्थापित करना पत्रकारिता की ज़िम्मेदारी है,” उन्होंने दो टूक कहा।

उत्कृष्ट पत्रकारों का सम्मान

कार्यक्रम में पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले पत्रकारों को सम्मानित किया गया। सम्मान प्राप्त करने वालों में –
भारत चौहान, रश्मि खत्री, जगदीश पोखरियाल, नागेंद्र उनियाल, राजीव खत्री व भुवन उपाध्याय शामिल रहे।

‘हिमालय हुंकार’ विशेषांक और ‘गंगा गाथा’ विमोचन

इस अवसर पर विश्व संवाद केंद्र द्वारा प्रकाशित पत्रिका ‘हिमालय हुंकार’ के नारद जयंती विशेषांक का विमोचन किया गया। साथ ही ‘गंगा गाथा’ नामक नाट्य-पुस्तक का भी लोकार्पण हुआ।

शोध और अध्ययन की दिशा पर बल

समारोह की अध्यक्षता करते हुए UPES के कुलपति प्रो. राम के. शर्मा ने कहा कि “वेद, उपनिषद और विज्ञान के आधार पर शोध कार्यों को आगे बढ़ाना समय की मांग है। अध्ययन ही जीवन को सार्थकता प्रदान करता है।”

कार्यक्रम की गरिमा और संचालन

कार्यक्रम का संचालन गजेंद्र खंडूड़ी और बलदेव पाराशर ने संयुक्त रूप से किया। आयोजन में प्रांत प्रचारक डॉ. शैलेन्द्र कुमार, विश्व संवाद केंद्र अध्यक्ष सुरेन्द्र मित्तल, निदेशक विजय कुमार, हिमालय हुंकार के संपादक रणजीत सिंह ज्याला, विभाग प्रचारक धनंजय, मनीष बागड़ी सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे,

विशेष टिप्पणी:
“नारद जयंती केवल एक आयोजन नहीं, पत्रकारिता की आत्मा को पुनः जागृत करने का अवसर है।” – मुकुल कानितकर