प्रधानमंत्री मोदी जल्द ही सड़क दुर्घटना पीड़ितों के लिए कैशलेस मेडिकल इलाज योजना शुरू करेंगे

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सड़क, परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जल्द ही सड़क दुर्घटना पीड़ितों के लिए कैशलेस मेडिकल इलाज योजना शुरू करेंगे। इस योजना के तहत, पीड़ितों को दुर्घटना की तारीख से अधिकतम 7 दिनों की अवधि के लिए प्रति पीड़ित प्रति 1.5 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज मिलेगा। वहीं, पीड़ितों को अस्पताल पहुंचाने वाले अच्छे लोगों को नकद पुरस्कार भी दिया जाएगा।नितिन गडकरी ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार वाहन-से-वाहन (वी2वी) संचार प्रौद्योगिकी लाने पर काम कर रही है। वी2वी संचार प्रौद्योगिकी की मदद से वाहन एक-दूसरे से सीधे संवाद कर सकेंगे, जिससे चालक को आसपास मौजूद अन्य वाहनों की गति, स्थिति, तेजी, ब्रेक लगाने की जानकारी और अचानक नजर न आने वाली जगह में मौजूद वाहनों के बारे में वास्तविक समय पर अलर्ट मिलेगा। इससे चालक समय रहते आवश्यक कदम उठा सकेगा और दुर्घटनाओं की आशंका कम होगी। स्लीपर बसों में आग लगने की घटनाएं रोकने के लिए केंद्र सरकार का बड़ा फैसला, ये सुरक्षा फीचर्स लगवाना अनिवार्य
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने गुरुवार को घोषणा की कि अब से स्लीपर कोच बसें सिर्फ़ ऑटोमोबाइल कंपनियाँ या केंद्र सरकार द्वारा खास तौर पर मान्यता प्राप्त सुविधाएँ ही बनाएंगी। इस फैसले का मकसद इन गाड़ियों से जुड़े आग लगने की घटनाओं की बढ़ती संख्या पर रोक लगाना है। केंद्रीय सड़क और परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने गुरुवार को कहा कि स्लीपर कोच बसें सिर्फ सरकार से मान्यता प्राप्त ऑटोमोबाइल कंपनियों द्वारा ही बनाई जाएंगी। गडकरी ने कहा कि बढ़ते स्पीलर बसों में बढ़ती आग की घटनाएं रोकने के लिए सरकार ने फैसला किया है कि स्लीपर कोच बसें सिर्फ़ ऑटोमोबाइल कंपनियों या केंद्र सरकार से मान्यता प्राप्त सुविधाओं द्वारा ही बनाई जाएंगी।नितिन गडकरी ने यह भी कहा कि अभी चल रही स्लीपर कोच बसों में ज़रूरी सुरक्षा फीचर्स लगाए जाने चाहिए, जिसमें आग लगने का पता लगाने वाले सिस्टम, इमरजेंसी लाइटिंग और ड्राइवर की नींद आने के इंडिकेटर शामिल हैं। इसके अलावा, यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी मौजूदा बसों में इमरजेंसी एग्जिट और हथौड़े होने चाहिए। स्लीपर कोच बसों को AIS-052 बस बॉडी कोड का पालन करना होगा, जो एक अनिवार्य राष्ट्रीय स्टैंडर्ड है जो संरचनात्मक, डिज़ाइन और सुरक्षा आवश्यकताओं को पूरा करता है। यह कोड यह सुनिश्चित करने के लिए ज़रूरी है कि भारत में बनी सभी बस बॉडी यात्रियों की सुरक्षा के उच्च मानक को पूरा करें। सरकार का लक्ष्य ड्राइवरों और यात्रियों दोनों के लिए सुरक्षा में काफी सुधार करना है।पिछले छह महीनों में ही स्लीपर कोच बसें छह बड़ी आग लगने की दुर्घटनाओं में शामिल रही हैं। इन दुखद घटनाओं में 145 लोगों की जान चली गई। जांच में अक्सर इमरजेंसी खिड़कियां गायब या खराब पाई जाती हैं। आग से सुरक्षा के उपकरणों की पूरी कमी होती है और कर्मचारियों को इमरजेंसी से निपटने के लिए ठीक से प्रशिक्षित नहीं किया जाता है।