कर्नाटक के हुबली में हुआ, जहां बीजेपी की एक महिला कार्यकर्ता पर निर्वस्त्र करने और बदसलूकी का आरोप लगा है। यह आरोप केशवपुर पुलिस स्टेशन के पुलिसकर्मियों पर है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुलिस ने कांग्रेस नगर निगम के एक सदस्य की शिकायत के आधार पर ऐसा किया, जिससे बीजेपी समर्थकों में भारी गुस्सा है। महिला के साथ हुई बदसलूकी की तस्वीरें सोशल मीडिया पर भी पोस्ट की गई हैं। पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी मामले की जांच कर रहे हैं। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, कांग्रेस पार्षद सुवर्णा कल्लाकुंतला की शिकायत के बाद महिला को हिरासत में लिया गया।हुबली में BJP महिला कार्यकर्ता के साथ पुलिस ने की थी बर्बरता, राष्ट्रीय महिला आयोग ने संज्ञान लेते हुए कही बड़ी बात हुबली में BJP महिला कार्यकर्ता के साथ कथित पुलिस बर्बरता के मामले में राष्ट्रीय महिला आयोग ने स्वतः संज्ञान लिया है। NCW ने कर्नाटक DGP से FIR, निष्पक्ष जांच और दोषी पुलिसकर्मियों पर सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए 5 दिन में रिपोर्ट तलब की है। राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने कर्नाटक के हुबली में एक महिला पार्टी कार्यकर्ता के साथ हुई कथित पुलिस बर्बरता की घटना पर स्वत: संज्ञान लिया है। यह घटना सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो से जुड़ी है,
जिस महिला के साथ यह घटना हुई, वह पहले कांग्रेस की कार्यकर्ता थीं और हाल ही में बीजेपी में शामिल हुई थीं। यह विवाद उन आरोपों से शुरू हुआ कि उन्होंने कुछ मतदाताओं के नाम हटाने में अधिकारियों की मदद की, जिसके कारण कांग्रेस और बीजेपी कार्यकर्ताओं के बीच झड़पें हुईं। पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि महिला पर पहले से ही कुछ आपराधिक मामले दर्ज हैं। पुलिस कमिश्नर फिलहाल केशवपुर पुलिस स्टेशन में हैं और मामले की गहराई से जांच कर रहे हैं। इस घटना से इलाके में राजनीतिक तनाव बढ़ गया है और दोनों पार्टियां एक-दूसरे के खिलाफ शिकायतें दर्ज करा रही हैं।जिसमें पुलिसकर्मियों द्वारा महिला को गिरफ्तार करते समय हमला करने और उसके कपड़े फाड़ने का आरोप है। आयोग की अध्यक्ष विजया रहतकर ने इस घटना की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि अगर यह आरोप साबित होता है, तो यह महिला की गरिमा, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और लिंग आधारित हिंसा से सुरक्षा के अधिकार का गंभीर उल्लंघन है।अगर अभी तक नहीं किया गया है, तो FIR दर्ज करें।
वीडियो सबूतों की जांच सहित निष्पक्ष, तटस्थ और समयबद्ध जांच कराएं।
अगर पुलिसकर्मियों की गलती पाई जाती है, तो उनके खिलाफ सख्त विभागीय और आपराधिक कार्रवाई शुरू करें।
पीड़िता को कानून के अनुसार चिकित्सा सहायता, मनोवैज्ञानिक समर्थन, पुनर्वास और मुआवजा सुनिश्चित करें।
आयोग ने 5 दिनों के भीतर विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट (ATR) मांगी है।











