हुकूमत एक्सप्रेस मुरादाबाद। इस वक्त शहर में जगह जगह चिकन से बनने वाले विभिन्न व्यंजनों के होटल व स्टाल आसानी से देखने को मिल जायेंगे। पिछले चार-पांच सालों में चिकन खाने वालों की संख्या में एकाएक बढ़ोत्तरी हुई है। यही वजह है कि शायद ही शहर का कोई्र मोहल्ला बचा हुआ हो जहां चिकन फ्राई, चिकन कोरमा, चिकन बिरयानी, चिकन कबाब, तवा चिकन, मुगलई चिकन, व्हाईट चिकन, चिकन चंगेजी, बटर चिकन के स्टाल व रेस्टोरेंट न नजर आते हों। असल में सूत्रों की मानें तो पोल्ट्री फार्म में जो बीमार मुर्गें होते हैं या जो मर जाते हैं वह सब आधे से भी कम दामों पर चिकन के व्यंजन बेचने वाले दुकानदारों को खपाये जाते हैं। एक किलो का मरा हुआ या बीमार मुर्गा 70-80 रूपये से भी कम कीमत पर दुकानदारों को मिल जाता है। इसके बाद इसको फ्राई कर 300 रूपये का एक मुर्गा बेचा जाता है। आसानी से अंदाजा लगाया जाता है कि इसमें कितना प्राॅफिट है। वहीं चिकन बिरयानी जो कि शहर में सबसे ज्यादा बिक रही है। ग्राहक इसे 120 रूपये प्रति किलो में खरीद रहे है। सूत्रों की मानें तो अधिकांश बिरयानी वाले मरा हुआ व बीमार मुर्गा प्रयोेग कर रहे है क्योंकि इसमें उन्हें अच्छा प्राॅफिट होता है। यही हाल फ्राई चिकन, चिकन कबाब व चिकन के अन्य आइटम बेचने वालो का है। शहर में कुछ ही दुकानें होगीं जहां इस तरह का गड़बड़झाला न हो रहा हो। सूत्रों की मानें तो खाद्य विभाग की टीम द्वारा जांच पड़ताल न करने से चिकन के आइटम बेचने वालों की पौबारह है और मरा हुआ व बीमार मुर्गा ग्राहकों को परोसा जा रहा है। इसकी पहचान यह होती है कि कई बार खाने के दौरान इसके मांस से खून निकल आता हैं। अगर खाद्य विभाग चेकिंग अभियान चलाये तो सारी असिलयत सामने आ जायेगी।











