भारतीय मूल के अंतरिक्ष यात्री अनिल मेनन ने मंगलवार को अपने दो रूसी साथियों के साथ रोस्कोस्मोस सोयुज MS-29 स्पेसक्राफ्ट से अपनी पहली स्पेस-फ़्लाइट शुरू की।

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भारतीय मूल के अंतरिक्ष यात्री अनिल मेनन ने मंगलवार को अपने दो रूसी साथियों के साथ रोस्कोस्मोस सोयुज MS-29 स्पेसक्राफ्ट से अपनी पहली स्पेस-फ़्लाइट शुरू की। वे इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) के लिए लगभग आठ महीने के मिशन पर निकले हैं।भारतीय मूल के अंतरिक्ष यात्री अनिल मेनन रूस के सोयुज MS-29 अंतरिक्ष यान से इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन की अपनी पहली अंतरिक्ष यात्रा के लिए रवाना हो गए हैं। उन्होंने कजाकिस्तान के ऐतिहासिक बैकोनूर कॉस्मोड्रोम से रूसी अंतरिक्ष यात्रियों प्योत्र दुब्रोव और अन्ना किकिना के साथ उड़ान भरी। यह दुब्रोव और किकिना दोनों के लिए दूसरा मिशन होगा।
उम्मीद है कि ये तीनों 2027 में पृथ्वी पर लौटने से पहले लगभग आठ महीने तक वैज्ञानिक शोध और टेक्नोलॉजी से जुड़े प्रयोग करेंगे। मंगलवार रात 8:17 बजे उड़ान भरने वाला यह अंतरिक्ष यान तीन घंटे से कुछ अधिक समय के बाद ऑर्बिटल लैबोरेटरी (कक्षीय प्रयोगशाला) से जुड़ेगा।नासा (NASA) का कहना है कि वह एडवांस्ड मेडिकल और टेक्नोलॉजी से जुड़े प्रयोगों में भी हिस्सा लेंगे, जिसमें अल्ट्रासाउंड प्रक्रियाएं शामिल हैं। इन प्रक्रियाओं में भविष्य के डीप स्पेस मिशनों के दौरान अंतरिक्ष यात्रियों की मदद के लिए ऑगमेंटेड रियलिटी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल किया जाएगा। मिशन के दौरान अनिल मेनन यह समझने के लिए महत्वपूर्ण शोध में हिस्सा लेंगे कि मानव शरीर अंतरिक्ष के माहौल में कैसे ढलता है। शोधकर्ता माइक्रोग्रैविटी (कम गुरुत्वाकर्षण) में रक्त के प्रवाह, नसों की संरचना और रक्त की बनावट का अध्ययन करेंगे। वह स्टेशन के पीने योग्य पानी का उपयोग करके इंट्रावेनस (IV) फ्लूइड बनाने के परीक्षण में भी मदद करेंगे। यह एक ऐसी नई तकनीक है जो भविष्य में चंद्रमा और मंगल ग्रह के लंबे मिशनों के लिए बहुत महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।अनिल मेनन मूल रूप से भारतीय है। उनके पिता भारतीय हैं और उनकी मां यूक्रेनी महिला हैं। अनिल मेनन के पास न्यूरोबायोलॉजी, मैकेनिकल इंजीनियरिंग और मेडिसिन में डिग्रियां हैं। बाद में उन्होंने हेल्थकेयर और अंतरिक्ष अन्वेषण (space exploration) के क्षेत्र में अपना करियर बनाया। मेनन एक इमरजेंसी मेडिसिन फिजिशियन और US स्पेस फोर्स में कर्नल हैं। US एयर फ़ोर्स में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने ‘ऑपरेशन एंड्योरिंग फ्रीडम’ के तहत अफगानिस्तान में फ्रंटलाइन पर काम किया और हिमालयन रेस्क्यू एसोसिएशन के लिए भी काम किया। 49 वर्षीय मेनन ने पोलियो टीकाकरण अभियानों के अध्ययन और समर्थन के लिए रोटरी एंबेसडेरियल स्कॉलर के तौर पर भारत में भी एक साल बिताया है।मेनन ने 2014 में NASA में फ्लाइट सर्जन के तौर पर अपना करियर शुरू किया और इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर रहने और काम करने वाले अंतरिक्ष यात्रियों के साथ काम किया। वे 2018 में SpaceX से जुड़े, जहां उन्होंने कंपनी का मेडिकल प्रोग्राम शुरू किया, पहली मानव अंतरिक्ष उड़ान की तैयारी में मदद की। बता दें कि नासा ने अनिल मेनन को जुलाई 2025 में इस मिशन के लिए नियुक्ति किया था।