गोद के तीन रूप,1-जन्म देने वाली माँ की गोद(जन्मदाता)।2-धरती मां की गोद सारी जिंदगी बौझ ढोनें वाली(पालनहार)। 3-अंतिम गोद (अर्थी)शकुन की नींद,कभी ना टूटने बाली।

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गोद के तीन रूप,1-जन्म देने वाली माँ की गोद(जन्मदाता)।2-धरती मां की गोद सारी जिंदगी बौझ ढोनें वाली(पालनहार)। 3-अंतिम गोद (अर्थी)शकुन की नींद,कभी ना टूटने बाली।
माँ की गोद-पहला स्वर्ग,जहाँ भूख मिटती है बिना मांगे,नींद आती है बिना दवा के,डर मिटता है बिना मंत्र के,नौ महीने कोख में, फिर सालों गोद में।दुनिया का सबसे सुरक्षित बिस्तर,धरती माँ की गोद,पूरा जीवन इसी की गोद में खेले।इसी पर दौड़े,इसी का अन्न खाया, इसी का पानी पिया,गिरे तो इसी ने संभाला,थके तो इसी पर लेट गए,हर पाप, हर पुण्य इसी की गोद में हुआ।अंतिम सुकून,जहाँ कोई तेरा ना मेरा,प्रभु,इससे बड़ी बराबरी कहाँ?राजा भी मिट्टी, रंक भी मिट्टी,डिग्री भी खाक, कुर्सी भी खाक।यहाँ (वी आई पी) कमरा नहीं, सबका एक ही शयनकक्ष,ब्रह्मांड।ना’ए सी’चाहिए, ना पंखा,ना पैसा चाहिए, ना रुतबा,
सब सुविधा उपलब्ध। शांति, मौन, सुकून,
माँ की गोद से आए, धरती की गोद में जिए,
धरती की गोद में ही समा गए।बीच में जो “मेरा-मेरा” चिल्लाते रहे,अंत में सब मिट्टी में फ़ना हो गए।इसलिए जो समझ गया वो झुककर जिया,जो ना समझा वोअकड़कर मिट गया।गोद ने सिखाया – लेना नहीं, देना है।माँ ने गोद दी,धरती ने सहारा दिया अंतिम समय तक,
हमने क्या दिया?1-माँ को वृद्धाश्रम। 2-धरती मां की गोद को कंक्रीट के जंगलों से लहूलुहान कर दिया।3-अंत में किसी को अर्थी भी ना दे पाए।
माँ की गोद से धरती की गोद तक।अधर्म, अभिमान,स्वार्थ,तिरस्कार,मोह,चारों तरफ हाहाकार मचा है।इंसानियत खत्म हो गई है धर्म स्थलों पर कुकर्म हो रहे हैं। भगवा लिबास कलंकित हो रहा है।गोद भी आज बदनाम हो गई है।ये है विकास,इंसानियत रौ रही है,चारों तरफ बस भ्रस्टाचार का बोलबाला है,कोई नही हे सुनने वाला। 🇮🇳 जय हिन्द,जय भारत,’धीर सिंह