सुबुलिया गांव निवासी 32 वर्षीय सुषांत साहू की सोमवार को इलाज के दौरान मौत हो गई

33
Share

ओडिशा के गंजाम जिले में पुलिस हिरासत में कथित यातना का एक गंभीर मामला सामने आया है। जिले के कबिसूर्यनगर थाना क्षेत्र के सुबुलिया गांव निवासी 32 वर्षीय सुषांत साहू की सोमवार को इलाज के दौरान मौत हो गई। मृतक के परिजनों ने आरोप लगाया है कि पुलिस हिरासत में सुषांत को बुरी तरह प्रताड़ित किया गया, जिसके कारण उसकी हालत गंभीर हो गई और उसकी जान चली गई। मामले को गंभीरता से लेते हुए ओडिशा के डीजीपी योगेश बहादुर खुरानिया ने ह्यूमन राइट्स प्रोटेक्शन सेल को जांच के आदेश दिए हैं। एचआरपीसी को कबिसूर्यनगर थाना केस नंबर 342/2026 और बैद्यनाथपुर थाना यूडी केस नंबर 412/2026 की निष्पक्ष जांच करने का निर्देश दिया गया है।सुषांत साहू को 25 मई को एक पत्थर ब्लास्टिंग मामले में पुलिस ने हिरासत में लिया था। परिवार का आरोप है कि उसे कई दिनों तक कबिसूर्यनगर थाने में रखा गया। शनिवार को जब उसे परिवार के हवाले किया गया, तब उसकी हालत बेहद गंभीर थी। परिजनों ने बताया कि सुषांत को पहले आस्का अस्पताल में भर्ती कराया गया। हालत बिगड़ने पर उसे बेहतर इलाज के लिए ब्रह्मपुर स्थित एमकेसीजी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल भेजा गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।सुषांत की पत्नी ममाजिन प्रधान ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ममाजिन प्रधान ने कहा,”मेरे पति एक दिहाड़ी मजदूर थे और शारीरिक रूप से दिव्यांग भी थे। वह काम पर गए थे और वहां किसी बात को लेकर शायद विवाद और कहासुनी हुई थी। पुलिस उन्हें पकड़कर ले गई। उन्होंने इतनी बेरहमी से पिटाई की कि उनके पूरे शरीर पर फफोले पड़ गए। उन पर गर्म पानी भी डाला गया। उन्हें एक सप्ताह तक वहां रखा गया और यातनाएं देने के बाद छोड़ा गया।” उन्होंने आगे आरोप लगाया,”उन्होंने उनके शरीर पर मिर्च पाउडर भी रगड़ा था। जब उन्हें मेरे हवाले किया गया तब उनकी हालत बहुत खराब थी। हम उन्हें अस्पताल लेकर गए, लेकिन जो दर्द और यातना उन्होंने झेली थी, उसी के कारण बाद में उनकी मौत हो गई।” परिवार का आरोप है कि पुलिस हिरासत के दौरान सुषांत को लगातार शारीरिक यातनाएं दी गईं। उनके शरीर पर गंभीर चोटों के निशान थे और पूरे शरीर में फफोले पड़ गए थे।सुषांत और एक अन्य व्यक्ति को स्थानीय पहाड़ी क्षेत्र में पुलिस की एक छापेमारी के दौरान पत्थर ब्लास्टिंग मामले में उठाया गया था। बताया जा रहा है कि दूसरे व्यक्ति को अदालत में पेश कर दिया गया, जबकि सुषांत को करीब सात दिनों तक थाने में रखा गया। आरोप है कि इस दौरान उसे कथित रूप से थर्ड डिग्री टॉर्चर का शिकार बनाया गया। बताया जा रहा है कि शनिवार को गंभीर हालत में छोड़े जाने के बाद सुषांत को रात करीब 1 बजे आस्का अस्पताल लाया गया था। वहां मेडिकल ऑफिसर ने उसके शरीर के कई हिस्सों, विशेषकर सीने पर चोट के निशान दर्ज किए थे। प्राथमिक उपचार के बाद उसे एमकेसीजी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल रेफर किया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।घटना के बाद इलाके में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। परिजन और ग्रामीण पुलिसकर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यदि हिरासत में यातना के आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। गंजाम के एसपी हरीश बी.सी ने कहा,”जो आरोप लगे हैं उनकी जांच होगी। प्राथमिक जांच के बाद मैं रिपोर्ट सौपुंगा। मेरे रिपोर्ट के बाद राज्य की एचआरपीसी भी जांच करेगी। इसमें जो जो शामिल होगा,उसके ऊपर एक्शन लिया जाएगा।मामले के कई एंगल हैं,हम सभी एंगल की जांच करेंगे।जो परिणाम निकलेगा,उसके आधार पर हम एक्शन लेंगे। किस आधार पर हिरासत में रखा गया था,इसकी भी जांच हो रही है। हम जरूर जांच करेंगे कि क्यों और कैसे रखा गया। मैं अभी आया ही हूं,लिहाजा मैं खुद जांच करूंगा। हम 24 घंटों से अधिक रख नही सकते,इस बार क्यों रखा गया था,इसकी जांच मैं खुद करूंगा।”फिलहाल डीजीपी के आदेश के बाद एचआरपीसी ने मामले की जांच शुरू कर दी है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि सुषांत साहू की मौत किन परिस्थितियों में हुई और हिरासत में प्रताड़ना के आरोपों में कितनी सच्चाई है।