मंगोलिया में ‘खान क्वेस्ट’ अभ्यास में भाग लेने पहुंची भारतीय सैन्य टुकड़ी, शांति अभियानों में बढ़ेगी दक्षता

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नई दिल्ली, 11 जून।भारतीय सेना की एक सैन्य टुकड़ी बहुराष्ट्रीय सैन्य अभ्यास ‘खान क्वेस्ट’ में भाग लेने के लिए मंगोलिया के उलानबटार पहुंच गई है। यह अंतरराष्ट्रीय अभ्यास 14 जून से 28 जून 2025 तक आयोजित किया जाएगा। अभ्यास का उद्देश्य विश्वभर की सेनाओं को शांति स्थापना अभियानों के लिए प्रशिक्षित करना, उनके बीच तालमेल बढ़ाना और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अध्याय VII के तहत शांति अभियानों के लिए तैयार करना है।

कुमाऊं रेजिमेंट के 40 जांबाज सैनिकों का दल

भारतीय सेना का यह दल कुल 40 कर्मियों का है, जिसमें मुख्य रूप से कुमाऊं रेजिमेंट के सैनिक शामिल हैं। इस दल में एक महिला अधिकारी और दो महिला सैनिक भी शामिल हैं, जो इस अभ्यास में भारतीय सैन्य बलों के विविधता और नारी शक्ति के संदेश को भी उजागर करेंगी।

22वें संस्करण का गवाह बनेगा मंगोलिया

यह अभ्यास अपने 22वें संस्करण में प्रवेश कर चुका है। ‘खान क्वेस्ट’ की शुरुआत वर्ष 2003 में अमेरिका और मंगोलिया के बीच द्विपक्षीय अभ्यास के रूप में हुई थी। 2006 से इसे बहुराष्ट्रीय अभ्यास का रूप दे दिया गया। पिछला संस्करण जुलाई-अगस्त 2024 में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ था।

इस बार भी दुनियाभर के सैन्य बलों की भागीदारी से मंगोलिया वैश्विक सैन्य रणनीति और शांति अभियानों के बड़े मंच के रूप में उभरेगा।

शांति स्थापना अभियानों की तैयारी में निखार

इस अभ्यास में भाग लेने वाली भारतीय सैन्य टुकड़ी को बहुराष्ट्रीय वातावरण में संयुक्त योजनाओं और सामरिक अभियानों का अभ्यास कराया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य भारतीय सेना की युद्ध तत्परता और अंतर-संचालन क्षमता को बढ़ाना है ताकि भविष्य में संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में उनकी भूमिका और प्रभावशीलता और मजबूत हो सके।

विशेष सामरिक अभ्यास होंगे केंद्र में

खान क्वेस्ट अभ्यास के दौरान सैनिकों को जिन सामरिक चुनौतियों से गुजरना होगा उनमें अपरिवर्ती (स्थिर) तथा गतिशील (मोबाइल) चेक प्वाइंट्स की स्थापना, घेराबंदी एवं तलाशी अभियान, संवेदनशील इलाकों में गश्त, शत्रु क्षेत्रों से नागरिकों की सुरक्षित निकासी, काउंटर इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED) ड्रिल, युद्ध क्षेत्र में प्राथमिक उपचार और घायल सैनिकों की त्वरित निकासी जैसे महत्वपूर्ण आयाम शामिल हैं।

साझा रणनीतियों के आदान-प्रदान का मौका

यह बहुराष्ट्रीय सैन्य अभ्यास भागीदार देशों को न केवल शांति स्थापना अभियानों में समन्वय बढ़ाने का अवसर देगा बल्कि रणनीति, तकनीक और श्रेष्ठ प्रक्रियाओं के साझा आदान-प्रदान का मंच भी प्रदान करेगा। इससे वैश्विक स्तर पर सेना के संचालन मानकों में सामंजस्य स्थापित होगा।

अंतरराष्ट्रीय सैनिक सौहार्द और भ्रातृत्व को मिलेगा बल

‘खान क्वेस्ट’ अभ्यास का एक बड़ा उद्देश्य विभिन्न देशों के सैनिकों के बीच सौहार्द, मैत्री और आपसी समझ को बढ़ावा देना भी है। इससे भारतीय सेना को न केवल अपने सामरिक कौशल को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप निखारने का अवसर मिलेगा बल्कि भविष्य के बहुराष्ट्रीय अभियानों में सहभागिता भी आसान होगी।

भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका का संकेत

भारतीय सेना की इस अभ्यास में सक्रिय भागीदारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विश्व गुरु भारत’ के दृष्टिकोण तथा रक्षा मंत्रालय की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति के अनुरूप है। इससे पूर्व भी भारत ने यूएन शांति अभियानों और वैश्विक संकटों में प्रमुख भूमिका निभाई है।

विशेषज्ञों के अनुसार इस तरह के अभ्यासों से भारतीय सेना की न केवल सामरिक क्षमताओं का विकास होता है बल्कि विश्व मंच पर उसकी विश्वसनीयता और प्रतिष्ठा भी बढ़ती है।