नई दिल्ली, 11 जून।भारत ने फ्रांस के नीस में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय समुद्री नौवहन सहायता संगठन (आईएएलए) की परिषद के दूसरे सत्र में उपाध्यक्ष के रूप में भाग लेकर वैश्विक समुद्री मामलों में अपनी भूमिका को और मजबूत किया है। यह आयोजन 1957 में आईएएलए की स्थापना के बाद से भारत की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता और सक्रिय योगदान का प्रमाण है।
भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व टी.के. रामचंद्रन ने किया
इस प्रतिष्ठित परिषद सत्र में भारत के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के सचिव श्री टी.के. रामचंद्रन ने किया। उनके साथ संयुक्त सचिव श्री मुकेश मंगल और निदेशक श्री कार्तिक चेनसुदार भी शामिल रहे।
सचिव (पीएसडब्ल्यू) श्री रामचंद्रन ने उद्घाटन सत्र में मुख्य भाषण देते हुए आईएएलए के साथ भारत के लंबे और गहरे सहयोग का उल्लेख किया। उन्होंने नौवहन और पोत यातायात सेवाओं के क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों को रेखांकित किया और बताया कि देश इस दिशा में नित नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है।
भारत की उपलब्धियों की वैश्विक स्तर पर सराहना
उन्होंने अपने संबोधन में ‘लाइटहाउस एंड लाइटशिप महानिदेशालय’ (डीजीएलएल) की प्रमुख पहलों पर प्रकाश डाला, जिनमें 12 प्रमुख बंदरगाहों में पोत यातायात सेवाओं का एकीकरण और कोलकाता स्थित समुद्री नेविगेशन प्रशिक्षण संस्थान में अंतर्राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन शामिल है।
इसके साथ ही, उन्होंने दिसंबर 2025 में मुंबई में आयोजित होने वाली तीसरी आईएएलए महासभा तथा वर्ष 2027 में प्रस्तावित 21वें आईएएलए सम्मेलन के लिए सभी सदस्य देशों को औपचारिक आमंत्रण भी दिया।
भारत का वैश्विक समुद्री क्षेत्र में बढ़ता प्रभाव
उल्लेखनीय है कि भारत 1980 से ही लाइटहाउस एंड लाइटशिप महानिदेशालय के माध्यम से आईएएलए परिषद का सक्रिय सदस्य रहा है। सिंगापुर में हुई पहली आम सभा के दौरान भारत को उपाध्यक्ष के पद पर चुना जाना उसके वैश्विक प्रभाव और रणनीतिक समुद्री दृष्टि का प्रतीक है।
तकनीकी मामलों पर गहन मंथन
परिषद के इस सत्र में कई महत्वपूर्ण तकनीकी मुद्दों पर विचार-विमर्श हुआ। इसमें नौवहन के लिए समुद्री सहायता का सामंजस्य, ऐतिहासिक लाइटहाउस स्थलों की विरासत का संरक्षण, विजुअल एटोएन (AtoN) के लिए हार्मोनाइज्ड इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) प्रोटोकॉल जैसी उभरती तकनीकों पर चर्चा हुई। साथ ही, समुद्री सेवा रजिस्ट्री के ब्यौरे और 2025-2026 के लिए निर्धारित आईएएलए गतिविधियों की योजना पर भी विचार किया गया।
समुद्री सुरक्षा व नवाचार में भारत की भूमिका की सराहना
आईएएलए परिषद के सदस्यों ने भारत की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि समुद्री सुरक्षा, नवाचार और विरासत संरक्षण के प्रति भारत की प्रतिबद्धता स्पष्ट रूप से परिलक्षित हो रही है। उन्होंने भारत द्वारा प्रमुख आईएएलए कार्यक्रमों की मेजबानी में निभाई जा रही नेतृत्वकारी भूमिका का भी स्वागत किया।
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत की यह भागीदारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार की ‘ब्लू इकॉनॉमी’ नीति तथा समुद्री परिवहन एवं सुरक्षा के क्षेत्र में ‘आत्मनिर्भर भारत’ संकल्प के अनुरूप है। भारत न केवल अपने तटीय क्षेत्रों में सुरक्षित नौवहन को सशक्त बना रहा है, बल्कि वैश्विक समुद्री संचालन में भी अहम स्थान प्राप्त कर रहा है।
समुद्री नीति में ऐतिहासिक परिवर्तन का संकेत
इस आयोजन के माध्यम से भारत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह भविष्य में वैश्विक समुद्री शासन संरचना में निर्णायक भूमिका निभाने के लिए तैयार है। परिषद में भारत की उपस्थिति इस बात का प्रतीक है कि आने वाले वर्षों में भारत समुद्री मार्गदर्शन, पोत यातायात सेवाओं तथा समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में विश्व में अग्रणी भूमिका निभाएगा।











