नई दिल्ली, 12 मई –भारत की यात्रा पर आए इथियोपिया के राज्यपालों, उप-राज्यपालों और मंत्रियों के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने आज केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह से मुलाकात कर दोनों देशों के बीच सहयोग और दोस्ती को और मज़बूत करने का संकल्प दोहराया।
डॉ. जितेंद्र सिंह, जो विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मामलों के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) हैं, ने इथियोपियाई प्रतिनिधियों का गर्मजोशी से स्वागत किया और देश के पश्चिमोत्तर हिस्से की वर्तमान स्थिति के बावजूद भारत के प्रति उनके अटूट समर्थन की सराहना की।
गवर्नेंस में भारत की तकनीकी क्रांति से हुए प्रभावित
इस मुलाकात के दौरान डॉ. सिंह ने भारत के तकनीक-संचालित शासन मॉडल को साझा किया। उन्होंने सीपीजीआरएएमएस (AI आधारित शिकायत निवारण प्रणाली), स्वामित्व योजना (ड्रोन आधारित भूमि रिकॉर्ड), डीबीटी (प्रत्यक्ष लाभ अंतरण), डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र और आईजीओटी कर्मयोगी जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म की सफलता का उल्लेख करते हुए बताया कि किस तरह भारत ने पारदर्शिता और नागरिक संतुष्टि को प्राथमिकता दी है।
डॉ. सिंह ने कहा, “प्रौद्योगिकी ने शासन को आम आदमी तक पहुँचाया है। हम अपने अनुभव इथियोपियाई मित्रों के साथ साझा कर गर्व महसूस करते हैं।”
गहरी होती दोस्ती और साझा भविष्य की ओर कदम
प्रतिनिधिमंडल भारत प्रवास के दौरान राष्ट्रीय सुशासन केंद्र (एनसीजीजी) में एक सप्ताह के प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग ले रहा है। विदेश मंत्रालय के आईटीईसी (ITEC) प्रभाग के तहत आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य इथियोपियाई अधिकारियों को वैश्विक नीतिगत चुनौतियों से निपटने के लिए बेहतर रणनीति, ज्ञान और अनुभव देना है।
डॉ. सिंह ने अगस्त 2023 में ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और इथियोपिया के प्रधानमंत्री डॉ. अबी अहमद की मुलाकात को याद करते हुए विकास, ICT, कृषि और युवा कौशल जैसे क्षेत्रों में सहयोग को दोहराया। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के “विश्व बंधु” दृष्टिकोण को भी रेखांकित किया।
भारत बना इथियोपिया में दूसरा सबसे बड़ा विदेशी नियोक्ता
डॉ. सिंह ने जानकारी दी कि 650 से अधिक भारतीय कंपनियां इथियोपिया में सक्रिय हैं और उनका कुल निवेश 5 बिलियन डॉलर से अधिक है। इससे भारत, इथियोपिया में दूसरा सबसे बड़ा विदेशी नियोक्ता बन गया है।
प्रशिक्षण से मिले सकारात्मक अनुभव
प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहीं इथियोपियाई हाउस ऑफ फेडरेशन की उपाध्यक्ष श्रीमती ज़हरा हुमेद अली और भारत में इथियोपियाई मिशन के उप प्रमुख मोलालिन असफाव ने भारत की मेहमाननवाजी और ज्ञान-साझा करने की परंपरा की सराहना की।
प्रतिनिधियों ने भारत के जमीनी स्तर पर प्रभावी शासन, समावेशी विकास और तकनीक आधारित नीतियों को सराहते हुए उन्हें “प्रेरणादायक और अनुकरणीय” बताया।
संयुक्त प्रयासों से बनेगा बेहतर भविष्य
बैठक के समापन पर डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, “हम पर्यावरण, विकास और वैश्विक स्थिरता जैसे मुद्दों पर एक साथ मिलकर काम करेंगे। सहयोग, साझा नवाचार और संस्कृति का आदान-प्रदान ही हमें एक सशक्त साझेदारी की ओर ले जाएगा।”
एनसीजीजी के महानिदेशक डॉ. सुरेंद्र कुमार बागड़े ने बताया कि अब तक 47 देशों के 5,000 से अधिक सिविल सेवकों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है, जिससे भारत की वैश्विक सुशासन में भूमिका और सशक्त हुई है।











