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रुद्रप्रयाग केदारनाथ यात्रा में घोड़ा खच्चरों का संचालन व्यवस्थित करने के लिए इस बार पंजीकरण व्यवस्था लागू की जाएगी। इसमें स्वस्थ्य घोड़ा-खच्चरों का पंजीकरण होगा। साथ ही प्रत्येक घोड़ा खच्चर का अलग-अलग टोकन नंबर होगा, जिससे उनकी देखरेख हो सके। यही नहीं, गौरीकुंड से केदारनाथ तक पैदल मार्ग पर घोड़ा-खच्चरों के प्रत्येक दो किमी पर पीने के लिए गर्म पानी मुहैया किया जाएगा।
घोड़ा-खच्चरों को केदारनाथ यात्रा की रीढ़ कहा जाता है। आपदा के बाद से यात्रा में प्रतिवर्ष घोड़ा खच्चरों की संख्या बढ़ी है। इस कारण, पैदल मार्ग पर पैदल यात्रियों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। साथ ही, बीते वर्षों में यात्राकाल के दौरान कई यात्री घोड़ा खच्चरों के धक्के से गंभीर रूप से घायल भी हो चुके हैं। बीते वर्ष यात्रा में यात्रा में घोड़ा खच्चरों की मौत और अव्यवस्थित संचालन का मामला प्रदेश के साथ-साथ केंद्र सरकार तक गूंजा। इससे सबक लेकर जिला प्रशासन और पशुपालन विभाग ने पहले से ही योजना बना ली है। इस बार यात्रा में घोड़ा खच्चरों की संख्या सीमित की जाएगी।

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