देहरादून। युवाओं में प्रतिस्पर्धा के साथ टीम लीड करने की ललक बढ़ रही है। इसे खुद को साबित करने की चाह भी कहा जा सकता है। काम करने से ज्यादा काम लेने का हुनर तरक्की में मददगार होता है। यही वजह है, आजकल नामी कंपनियों में युवा लीडर के रूप में दिखते हैं। थोड़ा इतिहास पर नजर डालें तो बहुराष्ट्रीय कंपनियां पहले पूरी दुनिया में युवाओं को नौकरी पर रखने के लिए एक ही रणनीति अपनाती थीं, लेकिन अब वो हर देश के युवाओं की प्राथमिकताओं के हिसाब से ढलने लगी हैं। पिछले कुछ समय में यह भी जाहिर हुआ है कि भारतीय कामकाजी युवा टीम भावना और मैनेजर व सहयोगियों से मिलने वाले सम्मान को अहम मानते हैं। आज की युवा पीढ़ी को काम पर रखने से पहले नियोक्तओं को अपना नेतृत्व विकास कार्यक्रम कुशलता से तैयार करना चाहिए, ताकि अधीर युवाओं को प्रबंधन की पटरी पर दौड़ाया जा सके।
होली आने वाली है। रंगों और खुशहाली का यह त्योहार सभी के लिए खास होता है। पर युवा इस पर्व को खासे उत्साह के साथ मनाते हैं। दुखद है कि कई बार होली पर हुड़दंग की खबरें आती हैं। यह हुड़दंग भी बच्चे, महिलाएं और बुगुर्ज नहीं, बल्कि युवाओं की हरकत होती है। पढ़े-लिखे और समझदार युवा त्योहार और समाज का लिहाज छोड़ ऐसी हरकतें कर बैठते हैं। यह हुड़दंग भी होशो-हवास में नहीं, बल्कि अधिकांश मौकों पर शराब के नशे में होता है। एक-दूसरे पर अबीर-गुलाल लगाना और होली की शुभकामनाएं देना तो होती की परंपरा रही है। लेकिन, कुछ युवा इस दिन सड़कों और गली-मोहल्लों में हो-हल्ला कर लोगों के साथ बदतमीजी पर उतर आते हैं। महिलाओं और युवतियों को जबरन रंग लगाने की भी कई घटनाएं अक्सर होली के रंग में भंग डाल देती हैं। युवाओं को थोड़ा गंभीर होने की जरूरत है। त्योहार सभी का है।











