हरिद्वार। गंगा रक्षा के लिए आंदोलन कर रहा मातृसदन आश्रम देश-विदेश के पर्यावरणविदों के जरिए अब इस मुहिम को और धार देगा। इसके लिए न केवल विभिन्न राज्यों में सम्मेलनों का आयोजन किया जाएगा, बल्कि संयुक्त राष्ट्र को पत्र भेज हस्तक्षेप का आग्रह भी किया जाएगा।
पिछले माह 14 दिसंबर से मातृसदन की साध्वी पद्मावती गंगा रक्षा के लिए अनशन पर बैठी हैं। इस दौरान वह केवल जल और शहद ग्रहण कर रही हैं। उनके समर्थन में मातृसदन आश्रम में दो दिवसीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। सोमवार को सम्मेलन के अंतिम दिन तरुण भारत संघ के अध्यक्ष जल पुरुष राजेंद्र सिंह ने कहा कि गंगा रक्षा के लिए मातृसदन आश्रम के ब्रह्मचारी संत निगमानंद और पूर्व प्रोफेसर ज्ञानस्वरूप सानंद अपना बलिदान दे चुके हैं। उन्होंने कहा कि अब फिर इस आश्रम की साध्वी पद्मावती अनशन पर बैठी हैं, लेकिन सरकार गंगा को बचाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा रही है।
कनाडा से आई पर्यावरणविद् सिमरन ने कहा कि गंगा भारत की ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व की धरोहर है। इसलिए विश्व के लोगों को गंगा रक्षा के लिए आगे आना चाहिए। फिरोजपुर झिरिका (हरियाणा) से आए पर्यावरणविद् इब्राहिम खान ने कहा कि गंगा रक्षा से मुस्लिम समाज को भी जोड़ा जाएगा, क्योंकि गंगा सबकी है। वहीं, रुड़की के पास पिरान कलियर से आईं शमा साबरिन ने कहा कि धरती पर जब तक गंगा है, तभी तक जीवन भी है। इसलिए वह सूफी संत समाज से आह्वान करती हैं कि वह गंगा को बचाने के लिए आगे आएं।
मातृसदन आश्रम के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद सरस्ती ने कहा कि मातृसदन गंगा रक्षा के लिए अपनी जिम्मेदारी निभा रहा है। उन्होंने कहा कि वह संयुक्त राष्ट्र संघ को भी पत्र भेजेंगे। उन्होंने कहा कि जल्द ही एक प्रतिनिधिमंडल गृह मंत्री अमित शाह से भी मिलेगा। उन्होंने सम्मेलन में 17 राज्यों से आए पर्यावरणविदों और बुद्धजीवियों का आभार भी जताया। सम्मेलन के अंतिम दिन नेपाल से आए पर्यावरणविद् विक्रम यादव, उत्तराखंड की केदार घाटी से सुशीला भंडारी, तमिलनाडु से भुवनेश्वरण ने भी विचार रखे।











