देहरादून। सूर्य उपासना के साथ शनिवार शाम को उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के विभिन्न घाटों में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा। दोपहर ढाई बजे के बाद से ही घाट किनारे छठव्रती पूजा सामाग्री और परिवार के साथ जुटते दिखे। जिसके बाद भगवान भास्कर की अराधना शुरु हुई।
टपकेश्वर, मालदेवता, रायपुर, नत्थनपुरा, पुलिया नंबर छह, प्रेमनगर, हरबंशवाला, सिंहल मंडी, चंद्रबनी, काठ बंगला घाट पर छठव्रती महिला पुरुष बहते पानी के अंदर हाथों में अगरबत्ती, और दीया लिए सूर्य अस्त का इंतजार करते नजर आए। साढ़े पांच बजे के करीब जैसे ही सूर्य भगवान अस्त हुए। छठव्रतियों ने सिंघाड़ा, नारियल, फलों के साथ ही सूप, कच्ची हल्दी, मूली, गन्ना आदि पूजन विधि को मिट्टी से बनी सुशुभिता पर चढ़ाकर विधि विधान से पूजा की।
इस दौरान घाट पर केरवा फरेला घवद से ओहे पे सुगा मंडराय…, देवी मइया सुन लो अरजिया हमार… जैसे गीत गूंजते सुनाई दिए। पूजा के बाद छठव्रती सुहागिनों ने एक-दूसरे को सिंदूर लगाया और पूजा की सामाग्री के साथ घर लौट गई। इस मौके पर टपकेश्वर घाट पर महापौर सुनील उनियाल गामा, मुख्य सचिव ओम प्रकाश ने शिरकत की। बता दें रविवार को अल सुबह सभी छठ व्रती फिर से छठ घाटों पर पहुंचेंगे और उगते सूरज को अघ्र्य देकर छठ पर्व का समापन करेंगे।
पूर्व संस्कृति मंच के विभिन्न घाटों में मौजूद हजारों श्रद्धालुओं ने पर्यावरण सरंक्षण और सिंगल यूज प्लास्टिक का प्रयोग न करने का भी संकल्प लिया। सभी घाटों पर वालंटियर और घाट प्रभारी, डाक्टर तैनात नजर आए। मीडिया प्रभारी संजय झा ने बताया कि बुधवार को सुबह सूर्य अघ्र्य पर पूजा समापन होगा। जिसके उपरांत घाटों की सफाई की जाएगी।











