ओडिशा सरकार ने कक्षा 1 से 8वीं तक की स्कूली पाठ्यपुस्तकों में भारी गलतियां होने की बात स्वीकार की

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ओडिशा सरकार ने कक्षा 1 से 8वीं तक की स्कूली पाठ्यपुस्तकों में भारी गलतियां होने की बात स्वीकार की है, लेकिन इन्हें वापस लेने से साफ इंकार कर दिया है।ओडिशा सरकार ने गुरुवार को त्रुटि वाली स्कूली पाठ्यपुस्तकों को वापस लेने से इंकार कर दिया। सरकार का कहना है कि शिक्षकों को निर्देश दिया गया है कि वे कक्षा में पढ़ाते समय गलतियों की पहचान करें और उन्हें ठीक करें, जबकि संशोधित संस्करण शैक्षणिक सत्र 2027-28 से मुहैया कराए जाएंगे।राज्य शैक्षणिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT) की निदेशक मधुस्मिता साहू ने कक्षा 1 से 8वीं की किताबों में गलतियां होने की बात स्वीकार करते हुए कहा कि ये किताबें राज्य भर के छात्रों में पहले ही बांटी जा चुकी हैं, इसलिए इन्हें वापस नहीं लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि शिक्षकों से कहा गया है कि वे छोटी कक्षाओं के छात्रों को उनकी किताबों में गलतियों को सुधारने में मदद करें, जबकि बड़ी कक्षाओं के छात्रों को शिक्षकों की देखरेख में खुद गलतियों को पहचानने और उन्हें ठीक करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।साहू ने कहा, “संशोधित और सुधारी गई पाठ्यपुस्तकें 2027-28 शैक्षणिक सत्र से प्रकाशित की जाएंगी।” उन्होंने कहा कि SCERT ने भविष्य में त्रुटि रहित पाठ्यपुस्तकें सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए हैं।विपक्षी बीजू जनता दल (BJD) ने पाठ्यपुस्तकों को तुरंत वापस लेने और छात्रों को त्रुटि रहित किताबें उपलब्ध कराने की मांग की। बीजद प्रवक्ता लेनिन मोहंती ने आरोप लगाया कि पाठ्यपुस्तकों में गलतियों की वजह से छात्रों में भ्रम पैदा हो सकता है और परीक्षाओं में उनके प्रदर्शन पर बुरा असर पड़ सकता है। मोहंती ने दावा किया कि सरकारी स्कूलों में पहली से आठवीं कक्षा के छात्रों को ऐसी पाठ्य-पुस्तकें बांटी गईं, जिनमें 1,760 गलतियां हैं, और सरकार ने गलतियां मानने के बावजूद उन किताबों को वापस नहीं लिया। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के जांच के आदेश देने के एक दिन बाद, सरकार ने खामियों की जांच के लिए एक उच्च-स्तरीय समिति का गठन किया। एक सरकारी अधिसूचना के मुताबिक, विकास आयुक्त सह अपर मुख्य सचिव देव रंजन कुमार सिंह इस समिति के अध्यक्ष होंगे। ओडिया भाषा, साहित्य और संस्कृति विभाग के सचिव विजय केतन उपाध्याय और उप सचिव (सामान्य प्रशासन) स्मिता पाणी इसके सदस्य होंगे। समिति को 7 दिनों के भीतर जांच पूरी कर सरकार को विस्तृत रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है।