मुंबई।ग्लैमर की चकाचौंध और फिल्मी परदे के पीछे की दुनिया अक्सर उतनी चमकदार नहीं होती, जितनी बाहर से दिखती है। इस बात को अभिनेत्री सोनम ने एक बार फिर अपने ताजा इंस्टाग्राम स्टोरीज़ के जरिए बेबाकी से साझा किया है। उन्होंने 1989 में आई फिल्म ‘मिट्टी और सोना’ को याद करते हुए अपने किरदार, अनुभवों और अंदरूनी जद्दोजहद की परतें खोली हैं।
उस समय सोनम की उम्र महज 15 से 16 साल थी — एक उम्र जब ज़्यादातर किशोर अपने स्कूल और सपनों की दुनिया में खोए होते हैं। लेकिन सोनम के लिए यह वक्त अपने करियर के सबसे चुनौतीपूर्ण और संवेदनशील किरदार को निभाने की तैयारी का था। फिल्म में उन्होंने कॉलेज गर्ल और तवायफ—दो विपरीत भूमिकाएं निभाईं, जो उनके अनुसार आज भी उनके दिल के सबसे करीब हैं।
रेड-लाइट एरिया का दौरा, और वहां की हकीकत से सामना
सोनम ने बताया कि फिल्म की तैयारी के लिए उन्होंने खुद रेड-लाइट एरिया का दौरा किया था। वह कहती हैं,
“मैं वहां गई, कुछ लड़कियों से बात की। उनसे मिलकर मुझे दुख, डर और सुरक्षा की भावना एक साथ महसूस हुई।”
यह अनुभव उन्हें ना सिर्फ किरदार की गहराई समझने में मदद कर गया, बल्कि उनकी सोच और संवेदनशीलता को भी एक नया आयाम दे गया। इस साहसिक कदम ने उन्हें फिल्म में अपनी भूमिका को ईमानदारी और संवेदना के साथ निभाने का आत्मबल दिया।
“ऐसा लगा जैसे मैंने कुछ पहना ही नहीं” — एक मुश्किल सीन की कहानी
एक सीन को याद करते हुए सोनम ने लिखा कि उन्हें एक स्किन कलर का शॉर्ट, स्ट्रैपलेस ड्रेस पहनकर कैमरे के सामने आना था।
“ड्रेस ऐसी थी जैसे मैंने कुछ पहना ही नहीं हो। पहले तो मैं इसके लिए तैयार थी, लेकिन जब कैमरे का एंगल और फ्रेम देखा, तो मैं फूट-फूटकर रोने लगी और सीन करने से मना कर दिया।”
उन्हें समझाया गया, मनाया गया, और आखिरकार उन्होंने खुद को संभालकर वह सीन पूरा किया। सोनम के शब्दों में,
“मैंने हिम्मत जुटाई उन लड़कियों से, जिन्हें मैंने रेड-लाइट एरिया में देखा था।”
यह अनुभव एक किशोरी के लिए जितना मानसिक रूप से कठिन रहा होगा, उतनी ही मजबूत उनकी अदाकारी उस सीन में दिखाई दी।
“मैं सिर्फ बिकिनी पहनने वाली ग्लैमरस लड़की नहीं थी”
फिल्म के वक्त तक सोनम की छवि एक ग्लैमरस अभिनेत्री की थी, जो बेझिझक बिकिनी पहनती थी। लेकिन ‘मिट्टी और सोना’ उनके लिए एक टर्निंग पॉइंट था।
“लोग मुझे ग्लैमरस सोनम कहते थे। लेकिन मैं इस फिल्म से कुछ साबित करना चाहती थी।”
उन्होंने साबित किया भी। भले ही उनका फिल्मी करियर सिर्फ चार साल का रहा, लेकिन सोनम मानती हैं कि इस फिल्म ने उन्हें अपने कलात्मक पक्ष को दिखाने का अवसर दिया।
निर्माता पहलाज निहलानी को धन्यवाद
सोनम ने फिल्म के निर्माता पहलाज निहलानी का खास तौर पर धन्यवाद किया कि उन्होंने उन्हें इतना जटिल और चुनौतीपूर्ण किरदार निभाने का अवसर दिया। यह वह दौर था जब मुख्यधारा की फिल्मों में इस तरह के द्वैध किरदार (कॉलेज गर्ल और तवायफ) बहुत कम देखने को मिलते थे, और शायद ही कोई अभिनेत्री इतनी कम उम्र में इसे निभाने को तैयार होती।
एक किशोरी से अदाकारा तक का सफर
सोनम का ये खुलासा ना सिर्फ उनके निजी संघर्ष को सामने लाता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि किस तरह एक अदाकारा पर्दे पर किरदार निभाने के लिए अपने मन और भावनाओं को झकझोरती है।
15 साल की उम्र में कैमरे के सामने नग्नता की छाया में किरदार निभाना, रेड-लाइट एरिया की सच्चाई को आत्मसात करना और ग्लैमर की छवि को तोड़ना—यह सब किसी भी युवा के लिए आसान नहीं होता।











