जम्मू सीमा पर पहुंचे केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, ‘विकसित कृषि संकल्प अभियान’ के तहत किया किसानों से संवाद

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जम्मू सीमा पर पहुंचे केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, ‘विकसित कृषि संकल्प अभियान’ के तहत किया किसानों से संवाद

चक्रोही (जम्मू), 30 मई। देश की सीमाओं से सटे गांवों में रहने वाले किसानों के जीवन में बदलाव लाने और वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू हुए ‘विकसित कृषि संकल्प अभियान’ के तहत केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज जम्मू के आरएस पुरा सेक्टर में पदयात्रा और तिरंगा यात्रा में भाग लिया। सीमावर्ती चक्रोही गांव, जो सीमा रेखा से महज एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, वहां पहुंचकर उन्होंने किसानों से सीधा संवाद, नर्सरी और खेतों का दौरा किया और ड्रोन ऑपरेटर्स व महिला किसानों से सीधे बातचीत की।

इस अवसर पर डॉ. जितेंद्र सिंह, जम्मू-कश्मीर के कृषि मंत्री जावेद अहमद डार, जम्मू के सांसद जुगलकिशोर शर्मा, क्षेत्रीय विधायक, केंद्रीय बागवानी आयुक्त डॉ. प्रभात कुमार और आईसीएआर के उपमहानिदेशक डॉ. राजबीर सिंह सहित बड़ी संख्या में वैज्ञानिक, अधिकारी और हजारों की संख्या में स्थानीय किसान उपस्थित रहे।

“सीमा पर जवान, खेत में किसान — दोनों भारत की शक्ति हैं”

चक्रोही में किसानों को संबोधित करते हुए श्री चौहान ने कहा कि “जम्मू-कश्मीर के ये गांव केवल सीमांत नहीं हैं, बल्कि यह देश की रक्षा की अग्रिम पंक्ति हैं। जब सीमा पर गोलियां चलती हैं, तो इन गांवों पर गोले गिरते हैं, लेकिन फिर भी यहां के किसान खेत जोतना नहीं छोड़ते। आप सबको बारंबार प्रणाम।” उन्होंने कहा कि हमारे जवान जहां सीमा की रक्षा कर रहे हैं, वहीं किसान अपने खेतों में हरियाली उगाकर देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित कर रहे हैं।

पहल घाटी में हमला मानवता पर कलंक: आतंकवाद को मिलेगा माकूल जवाब

उन्होंने हाल ही में हुए पहलगाम आतंकी हमले की निंदा करते हुए कहा कि “जिन्होंने हमारी बेटियों की मांग का सिंदूर पोंछा, उन्हें हमारी सेना ने तीन दिन में ऐसा जवाब दिया कि पाकिस्तान घुटनों पर आ गया।” प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हवाला देते हुए उन्होंने दो टूक कहा — “हम किसी को छेड़ते नहीं हैं, लेकिन अगर कोई छेड़ता है तो हम उसे छोड़ते नहीं हैं। वो गोली चलाएंगे, तो हम गोला चलाएंगे।”

वैज्ञानिकों से करें संवाद, खेती को बनाएं वैज्ञानिक — श्री शिवराज सिंह

श्री चौहान ने कहा कि इस अभियान के तहत वैज्ञानिक गांव-गांव जाकर किसानों से मिल रहे हैं, जो पहले कभी नहीं हुआ। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे वैज्ञानिकों से खुलकर बात करें, सवाल पूछें, और उन्हें अपने अनुभव भी साझा करें। उन्होंने कहा —

“यदि वैज्ञानिक खेतों की ज़रूरत के अनुसार अनुसंधान करेंगे और किसान उनकी सलाह अपनाएंगे तो कृषि क्षेत्र में चमत्कार होगा। जब ‘लैब-टू-लैंड’ की धारणा जमीनी हकीकत बन जाएगी, तब किसानों की आय भी बढ़ेगी और उत्पादन भी।”

उन्होंने वैज्ञानिकों से कहा कि अनुसंधान ऐसा हो जो सीधे किसान के खेत में काम आए, और किसानों से अनुरोध किया कि यदि वैज्ञानिकों को कोई जानकारी देनी हो तो वे संकोच न करें।

महिला किसानों और ड्रोन ऑपरेटर्स से सीधा संवाद

चक्रोही में श्री चौहान ने महिला किसानों और महिला उद्यमियों से सीधा संवाद किया। उन्होंने महिलाओं के योगदान को देश की कृषि अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताते हुए कहा कि “महिलाओं की मेहनत, दूरदर्शिता और नवाचार भारतीय कृषि को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहे हैं।” उन्होंने उन महिलाओं की सराहना की जो जैविक खेती, मशरूम उत्पादन, पशुपालन और ड्रोन तकनीक में सक्रिय रूप से भाग ले रही हैं।

इसके साथ ही उन्होंने ड्रोन ऑपरेटर्स से भी संवाद कर यह सुनिश्चित किया कि नई तकनीक गांवों तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने कृषि में टेक्नोलॉजी के उपयोग को बढ़ावा देने का लक्ष्य रखा है और ड्रोन क्रांति इसी दिशा में एक मजबूत कदम है।

कृषि में उत्पादन बढ़ाना और लागत घटाना है सरकार का संकल्प

अपने संबोधन में केंद्रीय मंत्री ने कहा —

“हमें उत्पादन बढ़ाना है, लागत घटानी है और उपज के लिए उचित दाम सुनिश्चित करना है। मोदी सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) दे ही रही है, इसके अलावा किसानों को कम ब्याज दर पर लोन, बीमा, विविधीकरण और प्राकृतिक आपदा से राहत जैसे प्रावधान किए गए हैं।”

उन्होंने स्पष्ट कहा कि जो नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई के लिए केंद्र और राज्य सरकार मिलकर पूरी ताकत से काम करेंगी।

जम्मू-कश्मीर की धरती सोना उगलती है

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जम्मू-कश्मीर की भूमि बेहद उपजाऊ है और यहां की कृषि विविधता देशभर के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने कहा —

“यहां का सेब पूरी दुनिया में मशहूर है। इसके अलावा केसर, अखरोट, बादाम जैसी मूल्यवान फसलें जम्मू-कश्मीर को आत्मनिर्भर बना सकती हैं। किसान अपनी फसल की क्वालिटी पर ध्यान दें, उत्पादन बढ़ाएं और वैज्ञानिकों से सलाह लेकर नई किस्में अपनाएं।”

‘विकसित भारत-2047’ की नींव मजबूत कर रहे हैं किसान

श्री चौहान ने ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य की चर्चा करते हुए कहा कि कृषि, ग्रामीण विकास और आत्मनिर्भरता इस लक्ष्य की बुनियाद हैं। उन्होंने कहा कि जब किसान समृद्ध होगा तो गांव समृद्ध होगा और जब गांव आगे बढ़ेगा तो भारत आगे बढ़ेगा। उन्होंने ज़ोर देते हुए कहा:

“किसान ही आत्मनिर्भर भारत के निर्माता हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हम न केवल किसानों की आय बढ़ा रहे हैं बल्कि गांवों में रोजगार और उद्यमिता के अवसर भी पैदा कर रहे हैं।”

क्या है ‘विकसित कृषि संकल्प अभियान’?

यह अभियान 15 दिन तक चलने वाला देशव्यापी कृषि जागरूकता कार्यक्रम है जिसे केंद्र सरकार द्वारा शुरू किया गया है। इसका उद्देश्य किसानों को नवीनतम कृषि तकनीक, वैज्ञानिक सलाह, सरकारी योजनाओं की जानकारी और किसान-वैज्ञानिक संवाद के ज़रिए उत्पादन, आय और आत्मनिर्भरता में वृद्धि करना है।

सहभागिता और प्रतिनिधित्व

इस महत्वपूर्ण अभियान कार्यक्रम में शामिल प्रमुख व्यक्तियों में थे:

  • डॉ. जितेंद्र सिंह, केंद्रीय मंत्री
  • श्री जावेद अहमद डार, कृषि मंत्री, जम्मू-कश्मीर
  • श्री जुगलकिशोर शर्मा, सांसद, जम्मू
  • केंद्रीय बागवानी आयुक्त डॉ. प्रभात कुमार
  • आईसीएआर के उप महानिदेशक (कृषि प्रसार) डॉ. राजबीर सिंह
  • SKUAST (शेर-ए-कश्मीर कृषि विज्ञान विश्वविद्यालय) के कुलपति
  • क्षेत्रीय विधायकगण, वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक व कृषि विभाग के अधिकारी

किसानों की आवाज़, सरकार की प्राथमिकता

कार्यक्रम में उपस्थित किसानों ने केंद्रीय मंत्री का स्वागत किया और कहा कि सरकार की ओर से जिस तरह सीमा से सटे क्षेत्रों के किसानों तक वैज्ञानिक, अधिकारी और मंत्री पहुंच रहे हैं, वह पहले कभी नहीं देखा गया। किसानों ने ड्रिप सिंचाई, बीजों की गुणवत्ता, मार्केटिंग, भंडारण और तकनीकी शिक्षा से जुड़ी समस्याएं रखीं, जिनका अधिकारियों ने मौके पर समाधान सुझाया।

 सीमाओं पर खड़ा भारत, खेतों में खड़ा भविष्य

केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की जम्मू यात्रा ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि भारत का भविष्य खेतों और सीमाओं दोनों में सुरक्षित है। जहां सैनिक बंदूक से सरहद की हिफाजत कर रहे हैं, वहीं किसान हल से देश की अर्थव्यवस्था को सींच रहे हैं।

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में जब ‘लैब-टू-लैंड’ की क्रांति और ‘ड्रोन से खेत तक’ की योजना जमीन पर उतर रही है, तो न केवल किसान बल्कि देश का हर नागरिक गर्व के साथ कह सकता है —
“कृषक देश का भाग्यविधाता है, और यही आत्मनिर्भर भारत का अग्रदूत भी।”