नई दिल्ली। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने शनिवार को सीमावर्ती राज्यों के किसानों के कृषि कार्यों और संसाधनों की उपलब्धता को लेकर उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। उन्होंने कहा कि सीमा पर जहां सैनिक देश की रक्षा में जुटे हैं, वहीं सीमावर्ती किसान खेतों में डटे हुए हैं। ऐसे में किसानों की चिंता करना हमारी ड्यूटी है।
कृषि मंत्री ने गुजरात, राजस्थान, पंजाब, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और हरियाणा के सीमावर्ती जिलों की स्थिति का जायजा लिया और निर्देश दिए कि इन क्षेत्रों में खेती सुरक्षित रहे, इसके लिए केंद्र और राज्य मिलकर कार्य करें। उन्होंने कहा कि कई किसान सुरक्षा कारणों से अपनी जमीन से दूर हैं, ऐसे में यह हमारी ज़िम्मेदारी बनती है कि उनकी फसलें और भविष्य सुरक्षित रहें।
खरीफ फसल के लिए संसाधनों का जल्द हो आंकलन
मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि खरीफ की बुवाई से पहले आवश्यक बीज, खाद और अन्य कृषि सामग्रियों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि प्रभावित किसानों से संवाद स्थापित कर उनके लिए आवश्यक सहायता योजनाएं तैयार की जाएं।
सीमा से लगे गांवों में खेती योग्य जमीन का आकलन करें
श्री चौहान ने कहा कि सीमा से 10-15 किलोमीटर की पट्टी में आने वाले गांवों की पहचान कर यह पता लगाया जाए कि वहां कितनी कृषि भूमि है और कौन-कौन सी फसलें बोई जाती हैं। जिन किसानों की खेतों तक पहुंच संभव नहीं है, उनकी मदद के लिए राज्य सरकारों के साथ समन्वय कर विशेष योजनाएं बनें।
मुख्यमंत्रियों से होगा समन्वय
कृषि मंत्री ने कहा कि जिन किसानों की खेती पर मौजूदा हालातों का असर पड़ा है, उनके लिए राज्य सरकारों के साथ मिलकर विस्तृत योजना बनाई जाएगी। उन्होंने बताया कि सभी संबंधित राज्यों के मुख्यमंत्रियों, मुख्य सचिवों और कृषि अधिकारियों से समन्वय किया जा रहा है ताकि किसानों को हरसंभव मदद दी जा सके।
देश में खाद्यान्न की कोई कमी नहीं
बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि देश में खाद, बीज, डीजल और अन्य जरूरी संसाधनों की कोई कमी नहीं है। यूरिया, डीएपी और एनपीके की आपूर्ति सामान्य है। फिर भी बफर स्टॉक बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं ताकि किसी आपात स्थिति में तत्काल मदद उपलब्ध हो सके।
देश सेवा के लिए कमर कसने का अवसर: शिवराज सिंह
बैठक के अंत में मंत्री ने कहा, “यह देश सेवा के लिए पूरी तरह कमर कसकर काम करने का समय है। सीमावर्ती किसानों की चिंता करना केवल एक सरकारी कार्य नहीं, बल्कि हमारा राष्ट्रीय कर्तव्य है।”











