तीर्थनगरी ऋषिकेश में नालों का जहर घुल रहा गंगा में

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ऋषिकेश। पहाड़ों की गोद में कल-कल बहती गंगा के तीर्थनगरी ऋषिकेश में प्रवेश करते ही उसमें दूषित नालों का जहर भी घुलने लगता है। तीर्थनगरी क्षेत्र में तमाम ऐसे नाले हैं, जो गंगा में जहरीला बना रहे हैं। गंगा को प्रदूषणमुक्त करने के लिए धरातल पर काम पूरा नहीं हो सका है।
पांच वर्ष पूर्व केंद्रीय जल आयोग के सर्वे में क्षेत्र के चार नालों को गंगा की सेहत के लिए खतरनाक माना गया था। इन नालों को बंद करने और इनके पानी के शोधन के लिए नमामि गंगे परियोजना में वृहद स्तर पर योजनाएं संचालित हो रही हैं। अभी तक इन योजनाओं का काम पूरा नहीं हो पाया।
तीर्थनगरी ऋषिकेश क्षेत्र में तपोवन से लेकर लक्कड़ घाट तक करीब दस किमी क्षेत्र में दर्जनभर छोटे-बड़े नाले और जल राशियां गंगा में मिलती हैं। इस क्षेत्र में भी नमामि गंगे परियोजना के तहत करोड़ों की लागत से निर्माण कार्य हो रहे हैं। इनमें सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी), नई राइजिंग लाइन बिछाने और दूषित नालों को टेप करने की योजनाएं शामिल हैं।
बीते दो वर्षों से निर्माणाधीन इन योजनाओं पर अभी तक 70 फीसद काम ही पूरा हो पाया है। नतीजा, अभी तक कोई भी नाला या दूषित जल राशि गंगा में मिलने से नहीं रोकी जा सकी है। नमामि गंगे परियोजना में ढालवाला व शीशमझाड़ी ड्रेन को टेप कर इनके शोधन के लिए एसटीपी का निर्माण किया जा रहा है। रंभा नदी के शोधन को भी बापूग्राम में एसटीपी का निर्माण प्रस्तावित है। इस पर कार्य कब शुरू होगा, कहा नहीं जा सकता।

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