तेहरान। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने रविवार को कहा कि दोहा में जारी वार्ता का सकारात्मक नतीजा अमेरिका के जवाब पर निर्भर करेगा। सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए ने यह जानकारी दी।
अराघची संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति समिति की बैठक से इतर बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि ईरानी प्रतिनिधिमंडल कतर के दौरे पर है। इसका मुख्य उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की कोई योजना नहीं है।
उन्होंने बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की दो दिन की योजना पर बातचीत जारी है। हालांकि, अभी तक कोई नतीजा नहीं निकला है।
ईरान के सर्वोच्च नेता ने क्या आदेश दिया?
आईआरएनए के अनुसार, अराघची ने ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई के आदेश का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि खामेनेई ने सभी खतरों का सामना करने का आदेश दिया है। इसके लिए ‘तत्काल, प्रभावी और भौगोलिक रूप से बिना किसी रोक-टोक के जवाब’ देने को कहा गया है।
इससे पहले रविवार को अराघची ने कहा था कि होर्मुज जलडमरूमध्य को दो दिन के भीतर फिर से खोलने के प्रस्ताव पर कतर के मध्यस्थों के साथ बातचीत जारी है। यह प्रस्ताव इस पर निर्भर है कि अमेरिका तेहरान की शर्तें मान ले।
अराघची ने कहा कि कतर के साथ बातचीत के बाद इस रणनीतिक जलमार्ग को खोलने की प्रस्तावित समय-सीमा कम की गई है। पहले इसे पांच दिन में खोलने का प्रस्ताव था। अब इसे घटाकर दो दिन करने पर सहमति बनी है। उन्होंने कहा, कतर की ओर से ईरान के प्रस्ताव को लागू करने की समय-सीमा पांच दिन करने का सुझाव दिया गया था। इस स्तर पर हम ऐसे प्रस्ताव पर पहुंचे हैं, जिसमें इसे लागू करने की समय-सीमा घटाकर दो दिन कर दी गई है।
अमेरिका के सामने ईरान की क्या शर्तें हैं?
ईरान के विदेश मंत्री ने अपनी शर्तों के बारे में भी बताया। इनमें इस्लामाबाद समझौता के बाद लगाए गए प्रतिबंध हटाना शामिल है। इसके अलावा, क्षेत्र से अमेरिकी सैन्य बलों की संख्या कम करना भी शामिल है। ईरान ने तेल से जुड़े प्रतिबंधों में मिली छूट फिर से बहाल करने की मांग की है। उसने अपने उन सभी पैसों को जारी करने की मांग भी की है, जिन्हें रोककर रखा गया है।
अराघची ने कहा, हमारी शर्तों में इस्लामाबाद समझौते के बाद लगाए गए प्रतिबंध हटाना और क्षेत्र में अमेरिकी सेनाओं की संख्या कम करना शामिल है। हम तेल से जुड़ी छूट फिर से बहाल करने और अपने सभी रोके गए पैसे जारी करने की मांग करते हैं। इनमें कतर में रखे गए पैसे भी शामिल हैं।
