सुप्रीम कोर्ट ने कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय की कड़ी आलोचना की। कोर्ट ने कहा कि मंत्रालय ने दो सबसे महत्वपूर्ण नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) और अपीलीय न्यायाधिकरण (NCLAT) को पूरी तरह से अपने कब्जे में (हाईजैक) कर लिया है। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय ने नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) और इसकी अपीलीय संस्था NCLAT को पूरी तरह से अपने कब्जे में ले लिया है। यह तीखी टिप्पणी मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने की। ये टिप्पणियां NCLT और नेशनल कंपनी लॉ अपीलीय ट्रिब्यूनल (NCLAT) में काम कर रहे संविदा (कॉन्ट्रैक्ट) कर्मचारियों द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई के दौरान की गईं। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने NCLT और NCLAT के अध्यक्षों को नियुक्तियों के मामले में स्वायत्तता (आजादी) देने की वकालत की। साथ ही, उन्होंने अंतरिम उपाय के तौर पर प्रतिनियुक्ति (डेपुटेशन) का सुझाव दिया और UPSC या SSC के जरिए चरणबद्ध तरीके से नियमित भर्तियां करने की बात कही।याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि मुझे पता है कि ठेकेदार (कॉन्ट्रैक्टर) किस तरह से काम करते हैं। उन्हें न्यायिक या तकनीकी सदस्यों की कोई परवाह नहीं होती। अध्यक्षों के पास पूरी स्वायत्तता होनी चाहिए। वे UPSC/SSC के जरिए भर्तियां कर सकते हैं। ट्रिब्यूनल को कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय ने पूरी तरह से अपने कब्जे में ले लिया है। यह संस्था की स्वायत्तता पर प्रहार है। यही तो समस्या है। मंत्रालय पूरी तरह से इस पर नियंत्रण रखना चाहता है। यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है।
संविदा कर्मचारियों की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा ने दलील दी कि अदालत को इस मामले में फैसला लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि जो लोग लंबे समय से काम कर रहे हैं, उन्हें रातों-रात नौकरी से नहीं निकाला जाना चाहिए। मुझे जिम्मेदारी के साथ यह बताने के लिए कहा गया है कि पूरी संभावना है कि 1 या 2 नवंबर को मौजूदा कर्मचारियों को काम छोड़ना पड़ेगा और नियुक्तियां एक निजी कंपनी द्वारा की जाएंगी। उन्होंने छह साल तक काम किया है। भले ही वे संविदा (कॉन्ट्रैक्ट) पर हैं, फिर भी उनके कुछ अधिकार बनते हैं। जब MCA द्वारा उन्हें कॉन्ट्रैक्ट पर रखा जाता है, तो वे HRA या DA के हकदार नहीं होते। ऐसा इसलिए है क्योंकि आप पूर्णकालिक (फुल-टाइम) कर्मचारी नहीं चाहते हैं। अरोड़ा ने बताया कि NCLT के भर्ती नियमों में नियमितीकरण (रेगुलराइजेशन) का प्रावधान है और विज्ञापन में भी ऐसा ही कहा गया है।अगर भर्ती नियमों और विज्ञापन में इसका प्रावधान है, तो उन्हें पूरी तरह से बाहर क्यों निकाला जा रहा है? यह पूरी तरह से मनमाना होगा और अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन करेगा। उन्होंने कहा, “अध्यक्ष की मंजूरी के बिना किसी को भी नौकरी से नहीं निकाला जाना चाहिए। सी
CJI ने कहा कि वह संविदा (contractual) आधार पर नियुक्तियों के पक्ष में नहीं हैं। अपना अनुभव साझा करते हुए CJI ने बताया कि बॉम्बे में एक ऐसा मामला सामने आया था, जहां संविदा कर्मचारी मूल रिपोर्ट लेकर भाग गए थे, जिसके बाद FIR दर्ज करानी पड़ी थी। उन्हें न्यायिक सदस्यों या तकनीकी सदस्यों की कोई परवाह नहीं है। तकनीकी सदस्य अभी भी कुछ चीजों में हेरफेर कर रहे हैं। मैं इसे खुली अदालत में नहीं कहना चाहता। ये संविदा कर्मचारी न्यायिक सदस्यों को परेशान कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “इन संविदा कर्मचारियों को भी हटा दिया जाना चाहिए। इस कंपनी को भी खत्म कर देना चाहिए। NCLT और NCLAT दोनों के अध्यक्षों के पास पूरी स्वायत्तता होनी चाहिए। CJI ने कहा कि लोगों को प्रतिनियुक्ति (deputation) पर लाया जाना चाहिए और सरकारी विभागों के अनुभवी लोगों को नियुक्त किया जाना चाहिए।
