ट्रेन में रेलवे की चादरें चुराते हुए एक कपल को पकड़े जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। घटना में महिला यात्री गोद में बच्चा लिए खड़ी थी और बैग से रेलवे की पैक्ड चादरें निकल आईं। पकड़े जाने पर उन्होंने अटेंडेंट से बहस शुरू कर दी और चोरी का कारण टीटीई द्वारा अतिरिक्त शुल्क वसूलना बताया। अटेंडेंट के जवाब में कहा गया— “टीटीई के घर का है क्या चादर?” यह पूरा प्रसंग ‘चोरी और सीनाजोरी’ का अनोखा उदाहरण बन गया है।
इस वीडियो को इंस्टाग्राम पर नामक हैंडल से शेयर किया गया है। वीडियो में दिखता है कि ट्रेन अटेंडेंट बैग खोलने पर जोर देते हैं। महिला बार-बार इसे फालतू का ड्रामा बताती हैं। जब बैग खुलता है तो अंदर से रेलवे के भूरे कागज वाले पैकेट में सफेद चादरें निकल आती हैं। पकड़े जाने पर महिला दावा करती हैं कि टीटीई ने उनसे एक्स्ट्रा अमाउंट लिया था, इसलिए उन्होंने चादर चुरा ली। अटेंडेंट तुरंत जवाब देते हैं कि चादर टीटीई के घर की नहीं है, फिर क्यों चुरा रहे हो? महिला बात पलटते हुए कहती हैं कि वे चादर वापस दे रही हैं या नहीं, पहले यह बताओ। बहस तेज होती जाती है और महिला बच्चे को गोद में लिए अटेंडेंट से भिड़ जाती हैं।
रेलवे की चादर चुराने पर सजा
यह घटना रेलवे की बेडरोल चोरी की बढ़ती समस्या को उजागर करती है। एसी कोच में यात्रियों को चादर, कंबल, तकिया और तौलिया मुफ्त दिए जाते हैं, जिन्हें यात्रा समाप्त होने पर वापस करना अनिवार्य है। रेलवे प्रॉपर्टी एक्ट 1966 के तहत रेलवे की संपत्ति चुराना अपराध है। पहली बार पकड़े जाने पर एक साल तक की जेल या एक हजार रुपये जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। बार-बार की घटनाओं में सजा पांच साल तक बढ़ सकती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक पिछले कुछ वर्षों में करोड़ों की बेडरोल चोरी हुई है, जिससे रेलवे और ठेकेदारों को भारी नुकसान हुआ है।
यूजर्स ने दी प्रतिक्रियाएं
सोशल मीडिया पर यूजर्स ने महिला के व्यवहार पर तीखी प्रतिक्रिया दी। कई ने लिखा कि चोरी पकड़े जाने पर बहाना बनाना और सीनाजोरी करना गलत है। कुछ ने टीटीई द्वारा अतिरिक्त शुल्क लेने के आरोप की जांच की मांग की, लेकिन ज्यादातर ने कहा कि गलत काम का जवाब गलत तरीके से नहीं दिया जा सकता। एक यूजर ने लिखा कि, “उसे लगा कि यह टिकट के साथ मुफ्त मिलेगा। कुर्ता-पजामा बनाने के लिए।”











