जेन जी के बाद जेन अल्फा सड़कों पर क्यों अलग-अलग शहरों में प्रदर्शन कर रहे बच्चे

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एजेंसी न्यूज
नई दिल्ली। हाल में नीट पेपर लीक के खिलाफ देशभर में जेन जी के प्रदर्शन देखने को मिले थे। अपनी मांगों को लेकर शुरू हुआ यह आंदोलन तब तक थमा नहीं, जब तक प्रदर्शन कर रहे युवाओं की मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई। अब कुछ वैसा ही विरोध देश के अलग-अलग हिस्सों में जेन अल्फा के बीच भी देखने को मिल रहा है।
2012 से 2024 के बीच जन्मे बच्चों को जेन अल्फा कहा जाता है। यह वह पीढ़ी है जो जन्म से ही इंटरनेट, स्मार्टफोन, सोशल मीडिया और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई के बीच बड़ी हुई है। इस पीढ़ी के बच्चों ने तकनीक को बाद में अपनाया नहीं, बल्कि उनके बचपन का बड़ा हिस्सा डिजिटल दुनिया के बीच बीता है। टैबलेट, वीडियो स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म, आॅनलाइन पढ़ाई, वीडियो कॉल, वर्चुअल क्लासरूम और स्मार्ट डिवाइस इनके लिए सामान्य चीजें हैं।
जेनरेशन अल्फा नाम का इस्तेमाल सबसे पहले आॅस्ट्रेलियाई रिसर्चर मार्क मैक्रिंडल ने 2008 में किया था। जेन एक्स, जेन वाई यानी मिलेनियल्स और जेन जी के बाद यह पहली पीढ़ी है, जिसका नाम अंग्रेजी अल्फाबेट के बजाय ग्रीक अल्फाबेट के अक्षर पर रखा गया।
झारखंड के गढ़वा जिले के कांडी प्रखंड स्थित दो स्कूलों में छात्रों ने अपने प्रधानाध्यापक मलय कुमार सिंह के तबादले के विरोध में प्रदर्शन किया। छात्रों का कहना था कि उनके प्रधानाध्यापक के आने के बाद स्कूल में पढ़ाई और अनुशासन का माहौल बेहतर हुआ था। इसलिए उनके तबादले को छात्र हित में सही नहीं माना जा सकता। मामला बढ़ने पर सैकड़ों छात्र सड़क पर उतर आए। उन्होंने मुख्य मार्ग को जाम कर दिया और टायर जलाकर विरोध जताया। छात्र सिर्फ स्थानीय स्तर पर प्रदर्शन करके नहीं रुके, बल्कि उनका एक प्रतिनिधिमंडल करीब 100 किलोमीटर दूर जिला मुख्यालय गढ़वा पहुंचा और उपायुक्त से मुलाकात कर अपनी मांग रखी।
छात्रों ने कहा कि जब तक प्रधानाध्यापक को वापस नहीं लाया जाता, उनका आंदोलन जारी रहेगा।
छात्रों के दबाव के बाद शिक्षा विभाग ने 13 अगस्त को मलय कुमार सिंह को दोबारा कांडी उच्च विद्यालय में प्रधानाध्यापक के रूप में पदस्थापित करने का आदेश जारी कर दिया। यानी यहां छात्रों की मांग पर प्रशासन को फैसला लेना पड़ा।