कर्नाटक के मुख्यमंत्री DK Shivakumar ने ऐलान किया,हर तालुका में जाकर लोगों की समस्याओं को सुनेंगे

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कर्नाटक के मुख्यमंत्री DK Shivakumar ने ऐलान किया है कि अलग से मंत्रालय बनाया जाएगा। इसके मंत्री हर तालुका में जाकर लोगों की समस्याओं को सुनेंगे। इस मंत्रालय का नाम प्रजा सेवक विभाग रखा जाएगा।
कैबिनेट ने प्रजा सेवक विभाग बनाने का फैसला किया है। कर्नाटक सरकार ने पब्लिक की शिकायतों के तत्काल समाधान और प्रशासन को लोगों के दरवाजे तक पहुंचाने के मकसद से एक नई पहल का ऐलान किया है। कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने बताया कि कैबिनेट ने ‘प्रजा सेवक विभाग’ के नाम से एक नया मंत्रालय बनाने का निर्णय किया है। इस डिपार्टमेंट के अंतर्गत मंत्री और जनप्रतिनिधि नियमित तौर पर लोगों के बीच जाकर उनकी समस्याओं को सुनेंगे और उनका समाधान कराएंगे, ताकि आम लोगों को अपनी शिकायतों को लेकर राजधानी बेंगलुरु के चक्कर न काटने पड़ें।कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा, ‘आज कैबिनेट में हमने एक बड़ा निर्णय लिया है। एक अलग मंत्रालय बनाया जाएगा और जिसके तहत एक मंत्री को पूरे कर्नाटक में लोगों की शिकायतों को सुनने की जिम्मेदारी दी जाएगी। इसमें मंत्री और विधायक भी शामिल हो सकते हैं। सभी मंत्रियों को हर सप्ताह में एक दिन किसी एक तालुका में जाना होगा। उन्हें लोगों से मिलना होगा, उनकी शिकायतों सुननी होंगी और उन्हें सुलझाना होगा।हमें लोगों को बेंगलुरु आने के लिए मजबूर नहीं करना चाहिए। इसे ‘प्रजा सेवक विभाग’ कहा जाएगा। फिर मैं यह सुनिश्चित करूंगा कि विधायक भी सभी घरों तक जाएं। इसके लिए एक अलग IAS अधिकारी को जिम्मेदारी दी जाएगी और उनके अलावा दूसरे अधिकारी भी होंगे: डीके शिवकुमारकर्नाटक सरकार का मानना है कि आम लोगों की शिकायतों को सुलझाने के लिए अलग मंत्रालय से प्रशासन और पब्लिक के बीच सीधा संवाद स्थापित होगा। लोकल लेवल पर लंबित समस्याओं का त्वरित निपटारा किया जा सकेगा। इस नए सिस्टम के अंतर्गत अफसरों और जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही भी तय होगी, जिससे लोगों की शिकायतों पर समय से एक्शन सुनिश्चित हो सके। कर्नाटक सरकार इसे जनभागीदारी और सुशासन को मजबूत करने की ओर में एक अहम कदम मान रही है।कर्नाटक सरकार की प्लानिंग है कि ‘प्रजा सेवक विभाग’ के जरिए मिली शिकायतों के निस्तारण की नियमित निगरानी हो सके। अफसरों को तय समयसीमा के अंदर मामलों को सुलझाने के निर्देश दिए जाएंगे। पेंडिंग मामलों की समीक्षा हाईलेवल पर की जाएगी। माना जा रहा है कि इस नए सिस्टम से ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों को राहत मिलेगी, क्योंकि उन्हें अपनी परेशानियों के समाधान के लिए बेंगलुरु के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।