‘मानवाधिकार उल्लंघनों के लिए ठहराया जाए जवाबदेह’; PoK में पाकिस्तान सेना की बर्बरता पर भारत

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नई दिल्ली. विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में पाकिस्तानी सेना के बर्बरता पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान को मानवाधिकार उल्लंघनों के लिए जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। इसके साथ ही मंत्रालय के प्रवक्ता ने कई अहम सवालों के जवाब दिए हैं।
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में कई दिनों से जारी विरोध प्रदर्शनों पर भारत ने प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साप्ताहिक प्रेस वार्ता में कहा कि हमने पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर के कई इलाकों में विरोध प्रदर्शनों की खबरें देखी हैं, जिनमें पाकिस्तानी सेना की तरफ से निर्दोष नागरिकों पर की गई बर्बरता भी शामिल है। हमारा मानना है कि यह पाकिस्तान के दमनकारी रवैये और इन इलाकों से संसाधनों की व्यवस्थित लूट का स्वाभाविक परिणाम है, जो उसके जबरन और अवैध कब्जे में हैं। पाकिस्तान को उसके भयावह मानवाधिकार उल्लंघनों के लिए जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।
वहीं कनाडा के साथ सुरक्षा सहयोग को लेकर किए गए सवाल पर उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल ने 18 सितंबर को कनाडा की नेशनल सिक्योरिटी एंड इंटेलिजेंस एडवाइजर नथाली ड्रूइन से मुलाकात की। दोनों पक्षों ने आतंकवाद, अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध और खुफिया सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा की। यह बैठक काफी सकारात्मक रही और सुरक्षा सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति बनी।
इस दौरान रणधीर जायसवाल ने बांग्लादेश के गृह सलाहकार जहांगीर आलम चौधरी के भारत पर लगाए आरोपों पर कहा कि ये पूरी तरह झूठे और बेबुनियाद हैं। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश की अंतरिम सरकार कानून-व्यवस्था संभालने में नाकाम रही है और अपनी नाकामी छिपाने के लिए दूसरों पर दोष मढ़ रही है। बेहतर होगा कि वे आत्मचिंतन करें और चिटगांव हिल ट्रैक्ट्स में अल्पसंख्यकों पर हमलों व कब्जों की जांच कराएं।
अपने साप्ताहिक प्रेस वार्ता में रणधीर जायसवाल ने बताया कि अफगानिस्तान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी को 9 से 16 अक्तूबर तक नई दिल्ली आने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की ओर से यात्रा की अनुमति मिली है। इस पर मंत्रालय आगे भी जानकारी साझा करेगा।
रणधीर जायसवाल ने इस दौरान कहा कि भारत और चीन के बीच सीधी हवाई सेवाएं फिर से शुरू करने पर वाणिज्यिक गतिविधियां शुरू हो चुकी हैं। यह दोनों देशों के बीच संबंध सामान्य करने की दिशा में अहम कदम है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि 3 अक्तूबर भारत और रूस की रणनीतिक साझेदारी की 25वीं वर्षगांठ है। 2000 में यह साझेदारी बनी थी। उन्होंने कहा कि भारत-रूस के बीच ‘विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी’ है। दोनों देश व्यापार, निवेश, रक्षा, विज्ञान और तकनीक जैसे हर क्षेत्र में रिश्तों को और मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।