लद्दाख पर अब एक्शन मोड में आई मोदी सरकार, दिल्ली से भेजा दूत; एलजी ने बुलाई मीटिंग

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एजेंसी समाचार
नई दिल्ली। लद्दाख में उपद्रव और हिंसा के बाद फिलहाल माहौल शांत है, लेकिन हालात अभी भी तनावपूर्ण बने हुए हैं। पूर्ण राज्य का दर्जा और संविधान की छठी अनुसूची के तहत स्वायत्तता की मांग को लेकर बीते दिनों भारी बवाल हुआ था। स्थिति को काबू में रखने के लिए केंद्र सरकार ने दिल्ली से एक विशेष दूत भेजा है, जो स्थानीय प्रतिनिधियों और संगठनों से बातचीत कर समाधान की कोशिश करेगा। इसी बीच उपराज्यपाल कविंद्र गुप्ता की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक बुलाई गई है। इसमें चीफ सेक्रेटरी पवन कोतवाल, डीजीपी एसडी सिंह जम्वाल, सेना और आईटीबीपी के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। बैठक में हिंसा के कारणों और सुरक्षा एजेंसियों की चूक पर चर्चा होगी। लेह में सख्त कर्फ्यू लागू है। हालांकि यदि हालात सामान्य रहे तो आज शाम तक कुछ ढील दी जा सकती है। पुलिस अब तक करीब 50 लोगों को हिरासत में ले चुकी है। संवेदनशील इलाकों में अर्धसैनिक बलों और पुलिस का लगातार मार्च जारी है। कर्फ्यू की वजह से लोगों को राशन, दूध और सब्जियों जैसी जरूरी चीजों की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। इसी कारण सरकार ने बुनियादी सामान खरीदने के लिए सीमित समय पर छूट देने का निर्णय लिया है।
शुक्रवार और शनिवार को लेह के सभी स्कूल-कॉलेज बंद रखने के आदेश दिए गए हैं। उपद्रव के बाद ऐक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने अपनी 15 दिन की भूख हड़ताल समाप्त कर दी। उनका कहना था कि हिंसा से आंदोलन की भावना को ठेस पहुंची है। वहीं, लद्दाख के निर्दलीय सांसद मोहम्मद हनीफा ने पुलिस फायरिंग पर सवाल उठाए और जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि जनता की मांगें जायज हैं और सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए।
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