श्राद्ध पक्ष के संदर्भ में गीत- पुरखों की यादें

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नई ताजगी भर जाती हैं
पुरखों की यादें

मन को दिया दिलासा
दुख के बादल जब छाए
खुशियाँ बाँटी संग
सुखद पल जब भी घर आए
सपनों में भी बतियाती हैं
पुरखों की यादें

स्वार्थपूर्ति का पहन मुखौटा
मिलता हर नाता
अवसादों के अंधड़ में जब
नजर न कुछ आता
बड़े प्यार से समझाती हैं
पुरखों की यादें

कभी तनावों के जंगल में
भटके जब-जब मन
और उलझनें बढ़ती जायें
दूभर हो जीवन
नई राह तब दिखलाती हैं
पुरखों की यादें

-योगेन्द्र वर्मा ‘व्योम’
मुरादाबाद।
मोबाइल- 9412805981