हरियाली तीज का व्रत कैसे किया जाता है? यहां जान लें सही विधि

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हरियाली तीज का व्रत कैसे किया जाता है? यहां जान लें सही विधि
हरियाली तीज का व्रत सुखद वैवाहिक जीवन के लिए रखा जाता है। इस दिन कुंवारी कन्याएं भी योग्य वर की कामना के साथ व्रत रखती हैं। ऐसे में आइए जान लेते हैं इस दिन व्रत रखने की सही विधि।
हरियाली तीज का पावन त्योहार हर वर्ष सावन के माह में मनाया जाता है। इस दिन महिलाओं के द्वारा शिव-पार्वती का पूजन किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन व्रत रखने से पारिवारिक जीवन में खुशहाली आती है। साथ ही माता पार्वती सुहागिन महिलाओं को अखंड सौभाग्य का वर देती हैं। हालांकि, इस दिन आपको व्रत पूरे विधि-विधान से करना चाहिए। आज हम आपको इसी के बारे में विस्तार से जानकारी देंगे।
हरियाली तीज 2025
हरियाली तीज का पावन पर्व श्रावण शुक्ल तृतीया को मनाया जाता है। साल 2025 में सावन तृतीया का आरंभ 26 जुलाई की रात्रि में 10 बजकर 44 मिनट पर हो जाएगा। वहीं इसका समापन 27 जुलाई की रात्रि में होगा। ऐसे में उदयातिथि की मान्यता के अनुसार 27 जुलाई को ही हरियाली तीज का व्रत रखा जाएगा।
हरियाली तीज व्रत विधि
हरियाली तीज के दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर आपको स्नान-ध्यान करना चाहिए। इसके बाद पूजा स्थल को स्वच्छ करके वहां गंगाजल आपको छिड़कना चाहिए। इसके बाद महिलाओं को 16 श्रृंगार करके पूजा स्थल पर बैठना चाहिए, पूजा का स्थान ईशान कोण में हो तो अच्छा माना जाता है। अगर इस दिशा में पूजा घर न हो तो यहां (ईशान कोण में) एक चौकी लगाकर उसपर शिव-पार्वती की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करके आपको पूजा करनी चाहिए। इसके बाद पूजा स्थल पर बैठकर हरियाली तीज के व्रत का संकल्प लें और पूजा आरंभ करेंगे। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती को फल, फूल, मिष्ठान आदि का भोग आपको लगाना चाहिए। इसके बाद हरियाली तीज की व्रत कथा का पाठ करें। शिवजी और पार्वती के मंत्रों का जप करें और अंत में आरती अवश्य करें। इसके बाद घर के लोगों को प्रसाद का वितरण करें। इस तरह आपको सुबह शाम के समय हरियाली तीज के दिन पूजा करनी चाहिए। हरियाली तीज व्रत का लाभ
हरियाली तीज का व्रत रखने वाली महिलाओं को माता पार्वती का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस व्रत के प्रभाव से दांपत्य जीवन में खुशियां आती हैं, साथ ही पति-पत्नी के बीच प्रेम और स्नेह भी बढ़ता है। परिवार में सुख और सौभाग्य की वृद्धि हरियाली तीज का व्रत रखने से होती है। इस व्रत को विधि-विधान से करने वाली महिला के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य में भी सकारात्मक बदलाव देखने को मिलते हैं।