पटना | ब्यूरो- देश के सबसे बड़े युवा खेल महोत्सव — खेलो इंडिया यूथ गेम्स 2025 — का भव्य शुभारंभ शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वर्चुअल संबोधन के साथ हुआ। प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर बिहार में पहली बार आयोजित हो रहे इस बहु-राज्यीय आयोजन को “नए भारत की खेल क्रांति” का प्रतीक बताया और कहा कि भारत का लक्ष्य अब वर्ष 2036 में ओलंपिक की मेजबानी करना है।
6,000 से ज्यादा युवा खिलाड़ी उतरे मैदान में
खेलो इंडिया यूथ गेम्स का यह सातवां संस्करण है और पहली बार बिहार की धरती पर इसका आयोजन हो रहा है। पटना, गया, राजगीर, भागलपुर और बेगूसराय जैसे शहरों में विभिन्न स्पर्धाएं आयोजित की जा रही हैं। इस बार प्रतियोगिता में 6,000 से ज्यादा युवा एथलीट हिस्सा ले रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने खिलाड़ियों को संबोधित करते हुए कहा, “यह खेल सिर्फ पदकों की होड़ नहीं, बल्कि आत्म-प्रेरणा, अनुशासन और टीमवर्क की परीक्षा है। आप सब भारत की खेल संस्कृति को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहे हैं।”
ओलंपिक की तैयारी और तीन गुना हुआ खेल बजट
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में बताया कि भारत वर्ष 2036 में ओलंपिक की मेजबानी की दिशा में अग्रसर है। इसके लिए सरकार ने देश के खेल बजट को तीन गुना से ज्यादा बढ़ाकर करीब 4,000 करोड़ रुपये कर दिया है।
देशभर में 1,000 से अधिक खेलो इंडिया केंद्र संचालित हो रहे हैं, जिनमें बिहार में ही तीन दर्जन से ज्यादा केंद्र कार्यरत हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि “राजगीर में खेलो इंडिया स्टेट एक्सीलेंस सेंटर, बिहार स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी और गांवों तक फैलती खेल सुविधाएं — ये सभी बिहार को खेल मानचित्र पर एक नई पहचान देंगे।”
खेल अब रोजगार और करियर का प्लेटफॉर्म
प्रधानमंत्री ने युवाओं को यह भी याद दिलाया कि खेल अब केवल स्टेडियम की सीमा तक नहीं रह गए हैं। उन्होंने कहा, “खेल के इकोसिस्टम से अब फिजियोथेरेपिस्ट, स्पोर्ट्स टेक एक्सपर्ट्स, डेटा एनालिस्ट, कोच, इवेंट मैनेजर, और यहां तक कि स्पोर्ट्स लॉयर जैसे प्रोफेशनल्स भी तैयार हो रहे हैं।”
नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत खेलों को मुख्यधारा की शिक्षा का हिस्सा बनाया गया है, जिससे स्कूल स्तर से ही प्रतिभाओं को आगे लाया जा सके।
पारंपरिक खेलों को भी मिली जगह
खेलो इंडिया यूथ गेम्स सिर्फ आधुनिक खेलों तक सीमित नहीं हैं। प्रधानमंत्री ने बताया कि कलारीपयट्टू, मल्लखंभ, योगासन, गतका और खो-खो जैसे पारंपरिक भारतीय खेलों को भी इस मंच पर स्थान दिया गया है। इसके अलावा वुशू, सेपक टाकरा, रोलर स्केटिंग जैसे नए और उभरते खेलों में भी भारत का प्रदर्शन उल्लेखनीय रहा है।
वैभव सूर्यवंशी का उदाहरण
प्रधानमंत्री ने बिहार के युवा क्रिकेटर वैभव सूर्यवंशी का जिक्र करते हुए कहा कि कैसे निरंतर प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेकर एक खिलाड़ी खुद को तराश सकता है। उन्होंने कहा, “जिस तरह क्रिकेट में वैभव ने आईपीएल में खुद को साबित किया, वैसे ही खेलो इंडिया मंच भी भविष्य के सितारे गढ़ रहा है।”
खेल के बहाने बिहार की संस्कृति का भी प्रचार
प्रधानमंत्री मोदी ने बिहार आने वाले खिलाड़ियों को लिट्टी-चोखा और मखाना चखने की भी सलाह दी और कहा कि खिलाड़ी जब यहां से वापस जाएंगे, तो अपने साथ बिहार की गर्मजोशी और संस्कृति की यादें लेकर लौटेंगे।
खेलो इंडिया: सिर्फ स्पर्धा नहीं, राष्ट्र निर्माण की दिशा
प्रधानमंत्री ने अंत में कहा, “खेल युवाओं में देशभक्ति, अनुशासन और सहिष्णुता का भाव भरते हैं। मैं चाहता हूं कि हर एथलीट इस मंच पर न केवल अपने राज्य का, बल्कि ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ का प्रतिनिधित्व करे।”
इस मौके पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, खेल मंत्री मनसुख मांडविया, राज्य मंत्री रक्षा खडसे और अन्य केंद्रीय मंत्री भी उपस्थित रहे।











