चारधाम यात्रा पर जा रहे हैं? आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. राजीव कुरेले से जानिए स्वास्थ्य और खानपान से जुड़ी जरूरी बातें

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ऊंचाई, मौसम और भीड़ से कैसे निपटें—एक संतुलित, प्राकृतिक और व्यवहारिक दृष्टिकोण

लेखक: आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. राजीव कुरेले | स्थान: देहरादून

चारधाम यात्रा—भारत की सबसे प्रतिष्ठित और आध्यात्मिक यात्राओं में से एक। हर साल लाखों श्रद्धालु उत्तराखंड के ऊंचे पर्वतीय मार्गों पर केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री की कठिन लेकिन पवित्र यात्रा पर निकलते हैं। परंतु इस यात्रा का एक पहलू अक्सर नजरअंदाज हो जाता है—स्वास्थ्य।

तेज चढ़ाई, अनियमित खानपान, मौसम का उतार-चढ़ाव और ऑक्सीजन की कमी… ये सभी मिलकर श्रद्धालुओं की सेहत पर असर डाल सकते हैं। इसीलिए इंडिया टुडे ने बात की प्रख्यात आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. राजीव कुरेले से, जिन्होंने बताया कि कैसे आप इस आध्यात्मिक यात्रा को सुरक्षित, सहज और ऊर्जावान बना सकते हैं।

यात्रा से पहले की तैयारी है सबसे जरूरी

डॉ. कुरेले का कहना है कि चारधाम यात्रा की शुरुआत शरीर को तैयार करने से होनी चाहिए। “10 से 15 दिन पहले से ही सुपाच्य और हल्का भोजन शुरू कर दें। ज्यादा तला-भुना, बासी और डिब्बाबंद खाना पूरी तरह से बंद करें। इससे पाचन तंत्र मजबूत रहेगा,” वे बताते हैं।

ऊंचाई पर सांस फूलना सामान्य है—but avoid panic

कामचलाऊ ऑक्सीजन सिलेंडर साथ रखना तो ठीक है, लेकिन योग और प्राणायाम से बेहतर कोई विकल्प नहीं। “अनुलोम-विलोम और भस्त्रिका जैसे श्वसन अभ्यास यात्रा से पहले शुरू करें। यह फेफड़ों की क्षमता को बढ़ाता है और ऊंचाई पर ऑक्सीजन की कमी से निपटने में मदद करता है,” डॉ. कुरेले सलाह देते हैं।

खानपान—मां के रसोईघर जैसा होना चाहिए

चारधाम यात्रा के दौरान भोजन बहुत साधारण होना चाहिए। “गर्म पानी पीते रहें। मूंग की खिचड़ी, उबली हुई सब्जियां, रोटी और देसी घी – ये सबसे उपयुक्त आहार हैं। सुबह की शुरुआत अदरक, तुलसी और काली मिर्च वाली हर्बल चाय से करें,” डॉ. कुरेले सुझाव देते हैं।

वे साफ कहते हैं—कोल्ड ड्रिंक्स, आइसक्रीम, बर्फ वाले पानी से दूरी बनाएं।

थकान, अपच और सर्दी से बचने के लिए ये दवाएं रखें साथ

डॉ. कुरेले कुछ आयुर्वेदिक औषधियों को हमेशा साथ रखने की सलाह देते हैं:

  • त्रिकटु चूर्ण – अपच, गैस और सर्दी से राहत
  • सिटोपलादि चूर्ण + शहद – खांसी व जुकाम में लाभदायक
  • ब्रह्मी वटी / अश्वगंधा – मानसिक थकान और तनाव से बचाव
  • दशमूलारिष्ट / च्यवनप्राश – रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए

यात्रा के दौरान अनुशासन ही रक्षा कवच है

चारधाम यात्रा कोई सामान्य पर्यटन नहीं है। यह आस्था की परीक्षा के साथ-साथ शरीर की सहनशक्ति की भी परीक्षा है। “तेजी से चढ़ाई न करें। हर 30-40 मिनट पर 5 मिनट रुकें। शरीर को मौसम से ढक कर रखें। गर्म कपड़े जरूर साथ लें, भले ही मई-जून का मौसम हो।”

डॉ. कुरेले की आखिरी सलाह —

“चारधाम यात्रा एक तपस्या है, पर्यटन नहीं। संयमित आहार, संतुलित नींद और सकारात्मक सोच के साथ यह यात्रा जीवन भर की ऊर्जा दे सकती है।”

अगर आप इस बार चारधाम यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो केवल टिकट और होटल की ही तैयारी न करें—अपने शरीर और मन की भी तैयारी करें। आयुर्वेद की मदद से यह यात्रा न केवल आध्यात्मिक उत्थान का माध्यम बन सकती है, बल्कि आपके स्वास्थ्य में भी नया संचार भर सकती है।