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रुड़की। उन्नत भारत अभियान (यूबीए) के तहत भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) रुड़की उत्तराखंड और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 377 गांवों की सूरत बदलने में अपना योगदान दे रहा है। अभियान के तहत गोद लिए गए गांवों में शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता, पर्यावरण व ऊर्जा बचत समेत अन्य क्षेत्रों में आइआइटी रुड़की के लगभग 120 विद्यार्थियों की टीम काम कर रही है।
मानव संसाधन विकास मंत्रालय की ओर से देशभर में चलाए जा रहे उन्नत भारत अभियान के तहत आइआइटी दिल्ली राष्ट्रीय समन्वय संस्थान (एनसीआइ) के रूप में कार्य कर रहा है। जबकि, आइआइटी रुड़की अभी तक महज प्रतिभागी संस्थान के रूप में ही काम कर रहा था। लेकिन, अब एनसीआइ ने उसे क्षेत्रीय समन्वय संस्थान (आरसीआइ) की जिम्मेदारी सौंपी है। प्रतिभागी संस्थान होने के नाते आइआइटी रुड़की ने यूबीए के तहत अभी तक हरिद्वार व देहरादून जिले के पांच गांवों पूरनपुर, मीरपुर, बेलड़ी, छरबा और चांदपुर को गोद ले रखा है। वहीं, आरसीआइ बनने के बाद संस्थान यूबीए से जुड़े पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के कुल 74 गांवों का मार्गदर्शन करेगा। इसके लिए आइआइटी रुड़की के जल संसाधन विकास एवं प्रबंधन विभाग के प्रो. आशीष पांडेय को समन्वयक बनाया गया है।
प्रो. पांडेय ने बताया कि मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने आइआइटी दिल्ली को एनसीआइ बनाया है। इसके तहत देशभर में लगभग 45 क्षेत्रीय समन्वय संस्थान कार्यरत हैं। आइआइटी रुड़की उनमें से एक है और उसके कार्यक्षेत्र में आने वाले कुल 74 प्रतिभागी संस्थानों में 34 पश्चिमी उत्तर प्रदेश व 40 उत्तराखंड से पंजीकृत हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रतिभागी संस्थानों ने 178 और उत्तराखंड के प्रतिभागी संस्थानों ने 199 गांवों को गोद ले रखा है। बताया कि क्षेत्रीय समन्वय संस्थान बनने के बाद गोद लिए गए इन 377 गांवों में यूबीए की गतिविधियां संचालित करने में आइआइटी रुड़की सभी प्रतिभागी संस्थानों का मार्गदर्शन कर रहा है।

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