अटल आयुष्मान योजना में सामने आई गड़बड़ी

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देहरादून। उत्तराखंड में आयुष्मान योजना का आगाज होने के बाद ही इसे घपलों के वायरस ने अपनी चपेट में लेना शुरू कर दिया था। निजी अस्पतालों ने मोटी कमाई करने के लिए योजना को दागदार करने की कोशिश की। न केवल फर्जी क्लेम बल्कि कार्डधारक से शुल्क वसूलने के भी मामले सामने आए, लेकिन राज्य स्वास्थ्य अभिकरण इन मामलों से सख्ती से निपटनेे और भविष्य में किसी गड़बड़ी की गुंजाइश न रहे, इसके लिए पुख्ता इंतजाम भी किए। स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर तैयार करने के साथ ही डेली क्विक ऑडिट सिस्टम विकसित किया। साथ ही बेनेफिशरी ऑडिट का प्रस्ताव भी केंद्र को भेजा गया है।
प्रदेश में अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना के अभी तक 36 लाख के गोल्डन कार्ड बने हैं। इस वक्त राज्य स्तर पर अधिकाधिक लोगों के गोल्डन कार्ड बनाने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। सालभर में एक लाख दस हजार मरीजों को इस योजना का लाभ मिल चुका है, जिस पर 105 करोड़ रुपये की धनराशि व्यय की गई है लेकिन ऐसा नहीं है कि योजना में सबकुछ सुगम रहा। एक साल के भीतर ही देहरादून, हरिद्वार और ऊधमसिंहनगर जिले के 13 निजी अस्पतालों में फर्जीवाड़ा पकड़ा गया।
जांच में पाया गया कि निजी अस्पतालों ने कमाई के फेर में फर्जी क्लेम प्रस्तुत किए। कहीं सामान्य रूप से बीमार मरीज को इमरजेंसी में भर्ती दिखाया, तो कहीं आइसीयू व डायलिसिस के नाम पर गड़बड़ी की गई। किया। सरकारी अस्पतालों से मरीजों को निजी अस्पतालों में रेफर करने में भी खेल हुआ। पता लगा कि सरकारी अस्पतालों में संविदा पर तैनात डॉक्टर निजी अस्पतालों में सेवाएं दे रहे हैं। वे सरकारी अस्पताल में इलाज न कर मरीजों को निजी अस्पतालों में रेफर कर रहे हैं। एक के बाद एक गड़बडियों पर राज्य स्वास्थ्य अभिकरण ने संज्ञान लिया और आगे इस तरह के फर्जीवाड़े न हों, यह सुनिश्चित करने के लिए एक पुख्ता तंत्र तैयार कर लिया है।

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