राजनीति का अखाड़ा न बने लोकतंत्र का मंदिर: ओम बिरला

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देहरादून। देश के विधायी निकायों के पीठासीन अधिकारियों का 79 वां दो दिवसीय सम्मेलन बुधवार से देहरादून में शुरू हो गया। उद्घाटन समारोह में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदनों के सुचारू संचालन पर जोर देते हुए कहा कि सभा में वाद-विवाद, सहमति-असहमति और चर्चा हो, लेकिन इसमें गतिरोध नहीं होना चाहिए। विरोध में भी गतिरोध न हो, यही विधायिका की मर्यादा है और यही लोकतंत्र की खूबसूरती भी। उन्होंने कहा कि विधायी निकाय लोगों की आकांक्षाओं व आस्था के मंदिर हैं। ऐसे में जरूरी है कि इन संस्थाओं में जनता के विश्वास को सुदृढ़ कर इसे मजबूत बनाया जाए। लिहाजा, लोकतंत्र के इन मंदिरों को राजनीति का अखाड़ा न बनने दें।
सम्मेलन का उद्घाटन करने के बाद लोकसभा अध्यक्ष बिरला ने कहा कि संसदीय लोकतंत्र की मजबूती की दृष्टि से यह सम्मेलन पीठासीन अधिकारियों को एक मंच प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि देश में मतदान का बढ़ता प्रतिशत ये बयां करता है कि लोकतंत्र के मंदिरों के प्रति जनता का विश्वास दृढ़ हुआ है। हमें इस भरोसे और लोकतंत्र की गरिमा को मजबूत बनाना होगा।
उन्होंने कहा कि यह प्रयास हो कि सबके सहयोग से सदन ज्यादा से ज्यादा चलें। हर परिस्थिति में संसदीय मर्यादा और प्रतिष्ठा को ऊंचाई तक ले जाएं। इस क्रम में उन्होंने लोकसभा सत्रों का उल्लेख किया। साथ ही कहा कि जनहित से जुड़े विषयों को सरकार तक पहुंचाना सबकी जिम्मेदारी है। ऐसे में शून्यकाल का महत्व बढ़ गया है।

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