सीएम रावत बोले, नमामि गंगे में शामिल हों गंगा की सहायक नदियां

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देहरादून। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने नमामि गंगे परियोजना में गंगा की सहायक नदियों से सटे नगरों में भी सीवेज प्रबंधन और ठोस अपशिष्ट निस्तारण की व्यवस्था का सुझाव दिया है। प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में शनिवार को कानपुर में हुई राष्ट्रीय गंगा परिषद की बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि गंगा की मुख्य धारा के साथ ही सहायक नदियों पर स्थित धार्मिक और पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण अन्य नगरों में भी सीवर लाइन जरूरी है। इसके लिए नमामि गंगे में वित्तीय सहायता की जरूरत है। उन्होंने कहा कि ठोस अपशिष्ट के निस्तारण को या तो नमामि गंगे में सहायता मिले या फिर स्वच्छ भारत मिशन में 90ः10 के अनुपात में सहायता दी जाए।
नमामि गंगे परियोजना के कार्यों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में चिह्नित 15 नगरों में स्वीकृत 19 योजनाओं में से 10 पूर्ण हो चुकी हैं। पांच योजनाएं इस माह और शेष अगले वर्ष नवंबर तक पूर्ण हो जाएंगी। इन नगरों में चिह्नित 135 नालों में 113 नाले टैप हो चुके हैं। शेष जल्द टैप कर लिए जाएंगे। गंगा किनारे प्रमुख स्थलों पर 21 स्नान घाट और इतने ही मोक्षगृह बनाए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि जगजीतपुर एसटीपी से 45 एमएलडी परिशोधित पानी का उपयोग कृषि सिंचाई में हो रहा है। स्लज को कृषि कार्यों में निश्शुल्क खाद के रूप में वितरित किया जा रहा है। हरिद्वार, ऋषिकेश व मुनिकीरेती में भी ऐसा ही किया जाएगा। उन्होंने गंगा से लगे 15 नगरों में घर-घर कूड़ा उठान, सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध और कूड़े से बिजली बनाने का उल्लेख भी किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 2021 में हरिद्वार में होने वाले महाकुंभ से पहले नमामि गंगे के कार्य पूर्ण कर गंगा की निर्मलता और स्वच्छता सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने प्रधानमंत्री से कुंभ में स्थायी व अस्थायी प्रकृति के कार्यों के लिए सहायता का अनुरोध किया।

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