गरीब आदमी की पहुंच से बाहर हैं मौसमी फल

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मु0 रिज़वान
मुरादाबाद। रमज़ान से पहले 30 रूपये किलो में बिकने वाला पपीता 60 से 70 रूपये किलो के भाव पर रमज़ान के दिनों में इतरा रहा है तो वहीं फलो के राजा आम भी अपने नखरे कम नहीं कर रहे और यह भी 60 रूपये प्रति किलो से कम नहीं है। इसी तरह अन्य मौसमी फलों के दाम भी इन दिनो आसमान पर है। कुल मिलाकर इस बार रमज़ान में गरीब आदमी की पहुंच से मौसमी फल बाहर रहे। गरीब आदमी मौसमी फलों का जायका लेने से इस बार वंचित रहा। फल मण्डी से कहीं ज्यादा महंगे दामों पर शहर में फल बेचने वालों ने अंधी काटी मगर इनके अंधे दामों पर जिला प्रशासन की कोई नजर नहीं गई। अंधाधुंध दामों पर फल बेचे जा रहे है। बेशुमार दौलत जिन पर है वह बिना मोलभाव के ही फल खरीद रहे हैं मगर 100-150 रूपये रोज कमाने वाला गरीब मजदूर इनके दाम सुनकर ही चेहरे पर मायूसी लिये चला जाता है और परिवार के साथ इफ्तार के दस्तरख्वान पर घर का बना खाना लेकर ही रोजा खोलता है और अल्लाह तआला का शुक्र अदा करता है।
इस बार रमज़ानो में फलो को लेकर जितनी महंगाई रही इतनी पहले कभी देखने को नहीं मिली। इफ्तार के वक्त जरूरी खजूर सबसे नीची क्वालिटी की सौ रूपये से कम में नहीं मिली। वहीं इसकी अधिकतम रेंज 800 रूपये प्रति किलो तक बाजार में मौजूद है। लीची 100 रूपये, अनार 120 रूपये, सेब 170 रूपये, अनानास 100 रूपये प्रति किलो, खरबूजा 30 रूपये किलो, तरबूज 15 रूपये किलो, केला 40 रूपये दर्जन की दर से बिक रहा है। यह सब वह फल हैं जो इफ्तार के दस्तरख्वान की रौनक बढ़ाते हैं। मगर फल बेचने वालों की मनमानी के चलते इनके दाम रमज़ानों में दोगुने से तिगुने कर दिये गये। गरीब आदमी इस बार रमजानो में इन फलो का जायका नहीं ले पाया। फलों का राजा आम जहां पिछले रमज़ान में 30 रूपये किलो में आसानी से मिल जाया करता था इस बार 60 रूपये की दर पर है। ताज्जुब की बात यह है कि फलों की मनमानी कीमतों की ओर जिला प्रशासन का कोई ध्यान नहीं है। ऐसा लगता है कि मौसमी फल केवल अमीरों के लिए रह गये है।
बुद्धिजीवियांे का कहना है कि कोई ऐसी व्यवस्था हो कि फल बेचने वाले मनमानी पर उतारू न हों और फलों के दाम एक हद तक निर्धारित हों। इन दिनों तो फलों की महंगाई आसमान छू रही है।

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