कर्नाटक हाई कोर्ट ने आलन्द टाऊन में एक दरगाह के अंदर मौजूद शिवलिंग की महाशिवरात्रि पर्व पर पूजा करने की अनुमति दे दी

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कर्नाटक हाई कोर्ट ने आलन्द टाऊन में एक दरगाह के अंदर मौजूद शिवलिंग की महाशिवरात्रि पर्व पर पूजा करने की अनुमति दे दी है। कोर्ट के इस फैसले से हिंदू पक्ष को बड़ी राहत मिली है।
सिद्ध रामैया हीरेमठ की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने पिछले साल की तरह इस साल भी 15 फरवरी को महाशिवरात्रि के दिन सीमित लोगों के साथ शिवलिंग की पूजा करने की अनुमति दे दी।
फरवरी 2025 में, कर्नाटक हाई कोर्ट ने हिंदू समुदाय के 15 सदस्यों को राघव चैतन्य शिवलिंग पर शिवरात्रि पूजा करने की इजाज़त दी थी। यह भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच किया गया था। कोर्ट के आदेश के आधार पर, शिवरात्रि के मौके पर बिना किसी अनहोनी के हिंदू पूजा की गई थी, जिसमें 15 हिंदुओं को दरगाह परिसर में घुसने और रस्में करने की इजाज़त दी गई थी। इस साल भी कोर्ट ने इसी तर्ज पर आदेश पारित किया है।इससे पहले आज सुबह दरगाह कमेटी ने हिन्दू संगठनों को पूजा करने की अनुमति न देने की अपील करते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था लेकिन चीफ जस्टिस की अगुवाई वाली बेंच ने ये कहते हुए याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया कि ऐसी हर याचिका की सुनवाई अगर सीधे सुप्रीम कोर्ट में होने लग जाएगी तो ये गलत संदेश जाएगा कि हाई कोर्ट बेकार हो चुके हैं।
अपनी याचिका में दरगाह कमेटी की ओर से कहा गया था कि वहां पर जो हो रहा है वो कोर्ट से अंतरिम आदेश लेकर किसी धार्मिक जगह का चरित्र बदलने का एक कोऑर्डिनेटेड पैटर्न है।
विवाद के केंद्र में जो दरगाह है, वह 14वीं सदी के सूफी संत, हज़रत शेख अलाउद्दीन अंसारी (जिन्हें लाडले मशाइक के नाम से भी जाना जाता है) और 15वीं सदी के हिंदू संत राघव चैतन्य से जुड़ी है, दोनों के अवशेष इसी जगह पर हैं। राघव चैतन्य शिवलिंग नाम का एक ढांचा भी इसी जगह पर है।
मुसलमान और हिंदू दोनों ही इस जगह पर पूजा करते थे। हालांकि, 2022 में पूजा के अधिकार को लेकर सांप्रदायिक तनाव बढ़ गया, जब कुछ बदमाशों ने कथित तौर पर शिवलिंग पर मल फेंक दिया।