एजेंसी समाचार
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को ‘राष्ट्रीय इंजीनियर दिवस’ के मौके पर महान भारतीय इंजीनियर और राजनेता सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया को श्रद्धांजलि दी। इसके साथ ही बेहतर भविष्य के लिए निर्माण, इनोवेशन और समाधान तैयार करने में इंजीनियरों के योगदान की सराहना की।
प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर देश भर के इंजीनियरों को बधाई दी और विश्वेश्वरैया को श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रधानमंत्री ने कहा, ‘सभी बेहतरीन इंजीनियरों को इंजीनियर्स डे की बधाई। वे लोग जो बेहतर कल के लिए निर्माण करते हैं, नई चीजें बनाते हैं और समाधान देते हैं। सर एम. विश्वेश्वरैया को श्रद्धांजलि, जिनकी इंजीनियरिंग की प्रतिभा और राष्ट्र-निर्माण की सोच आज भी प्रेरित करती है।’
पीएम मोदी ने एक वीडियो भी शेयर किया जिसमें उन्होंने विचारों और आकांक्षाओं को ठोस उपलब्धियों में बदलने में इंजीनियरों की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्हें देश की प्रगति के लिए काम करने वाले ‘कर्मयोगी’ बताया।
उन्होंने कहा, ‘इंजीनियर केवल मशीनें नहीं बनाते। वे कर्मयोगी हैं जो सपनों को हकीकत में बदलते हैं। मैं भारत के हर इंजीनियर की सराहना और प्रशंसा करता हूं। भारत में ऐसे कई इंजीनियर हुए हैं जिन्होंने अकल्पनीय को कल्पनीय में बदल दिया और ऐसे कारनामे किए जिन्हें इंजीनियरिंग की दुनिया में चमत्कार माना जाता है।’
वीडियो में, प्रधानमंत्री ने विश्वेश्वरैया की शानदार विरासत और भारत की इंजीनियरिंग विरासत में उनके योगदान को भी याद किया। पीएम मोदी ने आगे कहा, ‘महान इंजीनियरों की हमारी गौरवशाली विरासत में हमें एक अनमोल रत्न भी मिला, जिसके काम आज भी लोगों को आश्चर्यचकित करते हैं और वे थे भारत रत्न डॉ. एम. विश्वेश्वरैया। उनके नक्शेकदम पर चलते हुए, हमारे देश के इंजीनियरों ने पूरी दुनिया में अपनी एक अलग पहचान बनाई है।’
पूरे भारत में हर साल 15 सितंबर को ‘राष्ट्रीय इंजीनियर दिवस’ मनाया जाता है। यह दिन देश के प्रमुख सिविल इंजीनियर और जाने-माने राजनेता सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया की जयंती के उपलक्ष्य में मनाया जाता है, जिनके इंजीनियरिंग और राष्ट्र-निर्माण में दिए गए योगदान को आज भी याद किया जाता है।
15 सितंबर 1861 को जन्मे विश्वेश्वरैया, जिन्हें ‘एम.वी.’ (ट.श्.) से भी जाना जाता है। उन्हें व्यापक रूप से ‘आधुनिक मैसूर का जनक’ माना जाता है। उन्होंने सार्वजनिक बुनियादी ढांचे की प्रमुख परियोजनाओं के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। भारत में इंजीनियरिंग उत्कृष्टता के एक स्थायी प्रतीक बन गए।
सार्वजनिक परियोजनाओं, इंजीनियरिंग और समाज में उनके असाधारण योगदान के लिए विश्वेश्वरैया को 1955 में भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया गया था। उन्होंने मैसूर में कृष्ण राजा सागर बांध के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और बाढ़ से बचाव की जटिल प्रणालियों को डिजाइन करने और लागू करने में भी अहम भूमिका निभाई। भारत सरकार ने इंजीनियरिंग और राष्ट्र-निर्माण में विश्वेश्वरैया के असाधारण योगदान को देखते हुए 1968 में आधिकारिक तौर पर 15 सितंबर को राष्ट्रीय इंजीनियर्स डे घोषित किया। एजेंसी









