अरुणाचल प्रदेश की धरती एक बार फिर भूकंप के झटकों से हिल उठी

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अरुणाचल प्रदेश की धरती एक बार फिर भूकंप के झटकों से हिल उठी। राज्य के पश्चिमी कामेंग जिले में देर रात 12.58 मिनट पर भूकंप के झटके महसूस किए गए। रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 3.1 मापी गई। फिलहाल भूकंप से किसी तरह के नुकसान की खबर नहीं है। हालांकि जिस वक्त भूकंप आया उस वक्त अधिकांश लोग अपने घरों में सो रहे थे। नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी (NCS) ने सोशल मीडिया एक्स पर बताया कि भूकंप का झटका 10 km की गहराई पर 27.45° N अक्षांश और 92.11° E देशांतर पर रिकॉर्ड किया गया। पिछले साल 28 जुलाई को, नेशनल सेंटर ऑफ सीस्मोलॉजी के अनुसार, अरुणाचल प्रदेश के तिरप जिले में भारतीय मानक समय (IST) 18:36:23 बजे 3.5 तीव्रता का भूकंप आया था। NCS के अनुसार, भूकंप का स्थान 27.06 N अक्षांश, 95.42 E देशांतर पर था, जिसकी गहराई 7 km थी।
वहीं सुबह 5 बजकर 38 मिनट पर सिक्किम में भी भूकंप के झटके महसूस हुए। नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी के मुताबिक भूकंप का केंद्र सिक्किम के नामची में धरती के अंदर 5 किमी की गहराई पर था। भूकंप आए तो घर से बाहर खुले में निकल जाएं। यदि आप घर में फंस गए हों तो बेड या मजबूत टेबल के नीचे खुद को छिपा लें। घर के कोनों में खड़े होकर भी खुद को बचा सकते हैं। भूकंप आने पर लिफ्ट का इस्तेमाल बिल्कुल न करें। खुले स्थान में जाएं, पेड़ व बिजली की लाइनों से दूर रहें।
धरती मुख्य रूप से चार परतों से बनी हुई है, जिन्‍हें इनर कोर, आउटर कोर, मैन्‍टल और क्रस्ट कहा जाता है। क्रस्ट और ऊपरी मैन्टल को लिथोस्फेयर कहा जाता है। ये करीब 50 किलोमीटर की मोटी परतें होती हैं और इन्हें टैक्‍टोनिक प्लेट्स कहा जाता है। ये टैक्‍टोनिक प्लेट्स अपनी जगह से हिलती रहती हैं, खिसकती रहती हैं। ये प्‍लेट्स अमूमन हर साल करीब 4-5 मिमी तक अपने स्थान से खिसक जाती हैं। ये क्षैतिज और ऊर्ध्वाधर , दोनों ही तरह से अपनी जगह से हिल सकती हैं। इस क्रम में कभी कोई प्लेट दूसरी प्लेट के निकट जाती है तो कोई दूर हो जाती है। इस दौरान कभी-कभी ये प्लेट्स एक-दूसरे से टकरा जाती हैं। ऐसे में ही भूकंप आता है और धरती हिल जाती है। ये प्लेटें सतह से करीब 30-50 किमी तक नीचे हैं।