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देहारदून निवासी सेवानिवृत्त शिक्षक यज्ञदत्त शर्मा ने इस मामले में हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की है। इसमें कहा कि देहरादून विवि के वीसी सीएस नौटियाल ने अपनी नियुक्ति के लिए तैयार किए बायोडाटा में गलत तथ्य दिए हैं। उनकी नियुक्ति यूजीसी और सीएसआईआर के नियमों के विरुद्ध हैं। तत्कालीन शिक्षा सचिव डॉ. रणवीर सिंह की पहल पर उन्हें वीसी के पद पर नियुक्ति मिली है। याचिका में कहा कि कुलपति बनाए नौटियाल के पास शिक्षण का दस वर्ष का अनुभव तक नहीं है। इसके चलते वे वीसी पद के योग्य नहीं है। सीएसआईआर ने इस मामले में छूट के कोई आदेश भी पारित नहीं किए हैं। वीसी के चयन के लिए बनाई गई कमेटी भी नियमानुसार नहीं बनी है। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश रंगनाथन व न्यायमूर्ति आलोक वर्मा की खंडपीठ ने मामले में फैसला देते हुए कुलपति की नियुक्ति को अवैध ठहराते हुए निरस्त कर दिया।

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