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एजेंसी न्यूज
नई दिल्ली। तीन तलाक पर मोदी सरकार को गुरूवार को बड़ी कामयाबी मिली है। लोकसभा में लंबी चर्चा के बाद तीन तलाक पर ऐतिहासिक मुस्लिम वीमेन प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स ऑन मैरिज बिल पास हो गया है। केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने विधेयक को पेश किया। बिल के खिलाफ सभी 19 संशोधन खारिज हो गए।
एमआईएमआईएम के सांसद असदुद्दीन ओवैसी के भी 2 संशोधन थे। ओवैसी के पक्ष में दो और विरोध में 247 वोट पड़े। इसके साथ ही बीजू जनता दल के सांसद भ्रातृहरि महताब और कांग्रेस सांसद सुष्मिता देव का संशोधन प्रस्ताव भी वोटिंग में खारिज हो गए। इसके बाद बिल के पक्ष में हुई वोटिंग में ये पास हो गया। लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन ने इसकी जानकारी देते हुए सदन की कार्यवाही शुक्रवार तक के लिए स्थगित कर दी। कांग्रेस ने इसमें कुछ खामियों का उल्लेख करते हुए स्टैंडिंग कमेटी के पास भेजने की मांग की जिसे सरकार ने ठुकरा दिया।
इससे पहले, कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने इस बिल पर सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि सभी इस्लामी मुल्कों में भी तीन तलाक नहीं है। वहां भी तलाक से पहले नोटिस देते हैं। इससे तलाक पीड़ितों को मदद मिलेगी न कि शरिया में दखल दिया जाएगा। कानून मंत्री ने आगे कहा, सुप्रीम कोर्ट द्वारा तीन तलाक पर रोक लगाने के बावजूद अभी भी यह जारी है। आज सुबह मैंने अखबार में रामपुर का एक मामला देखा जिसमें देर से जगने पर पत्नी को तलाक दे दिया।
कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड्गे ने कहा बिल में कुछ खामियां हैं जो कमेटी दूर कर सकती है हम इसके समर्थन में हैं। कांग्रेस की ओर से की गयी इस मांग को सरकार ने ठुकरा दिया और कहा कि जो भी चर्चा हो सदन में ही होनी चाहिए। वहीं कांग्रेस सांसद सुष्मिता देव ने कहा, ‘इस विधेयक में तिहरे तलाक को अपराध घोषित किया जा रहा है लेकिन मुआवजे को लेकर स्पष्ट प्रावधान नहीं किया गया है। 1986 के कानून में मुआवजा देने का स्पष्ट प्रावधान है। अधिकतर मुस्लिम देशों में तलाक देने वाले पति को नोटिस देकर सूचना देने का प्रावधान रखा गया है।‘ इसका मसौदा गृह मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाले एक अंतर-मंत्री समूह ने तैयार किया है।

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