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एजेंसी न्यूज
नई दिल्ली। तीन तलाक देकर पत्नी को निराश्रित छोड़ने वाले पतियों को सबक सिखाने वाले विधेयक को हरी झंडी दे दी है। विधेयक में एक बार में तीन तलाक यानी तलाक-ए-बिद्दत संज्ञेय और गैर जमानती अपराध बनाने का प्रावधान है और अपराधी को तीन साल की सजा का। सुप्रीम कोर्ट पहले ही इसे असंवैधानिक करार दे चुकी है। दरअसल सुप्रीम कोर्ट से असंवैधानिक घोषित होने के बावजूद लगातार तीन तलाक की घटनाएं खत्म नहीं हो रही है।
इस साल सुप्रीम कोर्ट के फैसले के पहले तीन तलाक की 177 घटनाएं दर्ज हुईं थी जबकि फैसला आने के बाद 67 शिकायतें दर्ज हुई हैं। ये आंकड़े दर्ज शिकायतों के हैं वास्तविकता में इससे भी ज्यादा मामले हो सकते हैं। इसी कारण सरकार को नया कानून बनाने का फैसला लेना पड़ा और नए कानून की रूपरेखा तैयार करने के लिए गृहमंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में मंत्रिमंडलीय कमेटी बना दी गई। इसमें सुषमा स्वराज, अरुण जेटली, रविशंकर प्रसाद, पीपी चैधरी और डाक्टर जितेंद्र सिंह भी शामिल थे। विधेयक की रूपरेखा इसी समिति ने तैयार की है, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में मंजूरी दे दी गई। ध्यान रहे कि महिला अधिकार के इस विधेयक का राजनीतिक महत्व भी है।

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