लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल शिक्षा के विस्तार का जिक्र करते हुए कहा कि अब शहर की दूरी पढ़ाई में बाधा नहीं बन सकती। उन्होंने कहा कि डिजिटल सुविधाओं के विस्तार से गांवों में ज्ञान और आधुनिक अध्ययन संसाधनों की पहुंच आसान हुई है। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर 2017 से पहले और अब की स्थिति का उल्लेख करते हुए ग्रामीण शिक्षा में हुए बदलाव की जानकारी साझा की।
मुख्यमंत्री ने बहराइच के तेजवापुर ब्लॉक स्थित खसहा मोहम्मदपुर की ग्राम पंचायत डिजिटल लाइब्रेरी का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि पहले गांव के बच्चों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए किताबों और बेहतर संसाधनों के लिए शहर जाना पड़ता था। इससे समय और पैसा दोनों खर्च होते थे। अब ग्राम पंचायत सचिवालय में बनी डिजिटल लाइब्रेरी में पढ़ाई के लिए आधुनिक संसाधन उपलब्ध हैं।
लाइब्रेरी में कंप्यूटर, प्रिंटर, हाई-स्पीड इंटरनेट, वाई-फाई, स्मार्ट टीवी और सीसीटीवी की सुविधा है। यहां प्रतियोगी परीक्षाओं की पुस्तकों के साथ नेशनल बुक ट्रस्ट का साहित्य भी उपलब्ध कराया गया है। इससे छात्र-छात्राओं को किताबों के साथ डिजिटल कंटेंट और ई-लर्निंग की सुविधा भी गांव में ही मिल रही है।
सीएम योगी ने कहा कि यह बदलाव केवल एक गांव तक सीमित नहीं है। उनके अनुसार, 2017 से पहले ई-लाइब्रेरी की पहुंच राज्य और जिला स्तर के करीब 76 स्थानों तक सीमित थी, जबकि अब डिजिटल सुविधाएं 57,600 ग्राम पंचायतों तक पहुंच चुकी हैं। साथ ही करीब 60 लाख युवाओं को स्मार्टफोन और टैबलेट उपलब्ध कराए गए हैं।
उन्होंने बताया कि प्रदेश के 32 हजार से अधिक विद्यालयों में स्मार्ट क्लासरूम और 15 हजार से अधिक विद्यालयों में आईसीटी लैब के जरिए शिक्षा को तकनीक से जोड़ा गया है। हालिया सरकारी शिक्षा संबंधी आंकड़ों में भी 32 हजार से अधिक विद्यालयों में स्मार्ट क्लास और 15 हजार से अधिक विद्यालयों में आईसीटी लैब का उल्लेख है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि डिजिटल संसाधनों के कारण बच्चों और युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए शहरों का रुख करने की जरूरत कम हुई है। पंचायत स्तर पर स्थापित डिजिटल लाइब्रेरियों में किताबों के अलावा ई-बुक्स, वीडियो लेक्चर और अन्य डिजिटल अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है। पंचायतीराज विभाग के अनुसार, पहले चरण में 11,350 ग्राम पंचायतों में डिजिटल लाइब्रेरी स्थापित की जा रही हैं।
मुख्यमंत्री ने अपने पोस्ट में 2012 से 2016 के बीच की शिक्षा व्यवस्था का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि उस दौरान पर्याप्त सरकारी निधि होने के बावजूद 6.22 लाख बच्चों को पाठ्यपुस्तकें और 97 लाख बच्चों को यूनिफॉर्म नहीं मिल सकी थी। उन्होंने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में संसाधनों की उपलब्धता से लेकर उनकी पहुंच तक प्रदेश ने लंबी दूरी तय की है। एजेंसी
मुख्यमंत्री के मुताबिक, ग्राम पंचायत सचिवालय अब सिर्फ प्रशासनिक गतिविधियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इन्हें ज्ञान, तकनीक और डिजिटल सेवाओं के केंद्र के रूप में भी विकसित किया जा रहा है। खसहा मोहम्मदपुर की डिजिटल लाइब्रेरी को उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में बदलते अध्ययन परिवेश का उदाहरण बताया।
