भोलेनाथ की पूजा में बेलपत्र का विशेष महत्व बताया गया

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भगवान शिव का प्रिय माह सावन 30 जुलाई 2026 से आरंभ हो चुका है, जो कि रक्षाबंधन यानी श्रावण पूर्णिमा को समाप्त होगा। इस पूरे माह में भोलेनाथ की पूजा-अर्चना करने के साथ ही उपवास रखा जाता है। भोलेनाथ की पूजा में बेलपत्र का विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यता है कि भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए एक लोटा जल और बेलपत्र भी काफी होते हैं। तो आइए जानते हैं कि शिवलिंग पर कितने बेलपत्र चढ़ाना चाहिए और इसे चढ़ाने का सही नियम क्या है।भगवान शिव का प्रिय माह सावन 30 जुलाई 2026 से आरंभ हो चुका है, जो कि रक्षाबंधन यानी श्रावण पूर्णिमा को समाप्त होगा। इस पूरे माह में भोलेनाथ की पूजा-अर्चना करने के साथ ही उपवास रखा जाता है। भोलेनाथ की पूजा में बेलपत्र का विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यता है कि भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए एक लोटा जल और बेलपत्र भी काफी होते हैं। तो आइए जानते हैं कि शिवलिंग पर कितने बेलपत्र चढ़ाना चाहिए और इसे चढ़ाने का सही नियम क्या है।बेलपत्र को हमेशा उल्टा कर के चढ़ाएं। बेलपत्र का चिकना हिस्सा शिवलिंग से स्पर्श करते हुए चढ़ाना चाहिए। वहीं बेलपत्र कहीं से भी कटा-फटा, सूखा या कीड़ा लगा हुआ नहीं होना चाहिए।बेलपत्र को हमेशा उल्टा कर के चढ़ाएं। बेलपत्र का चिकना हिस्सा शिवलिंग से स्पर्श करते हुए चढ़ाना चाहिए। वहीं बेलपत्र कहीं से भी कटा-फटा, सूखा या कीड़ा लगा हुआ नहीं होना चाहिए। बेलपत्र कभी बासी नहीं होता। यदि आपको नया बेलपत्र न मिले तो आप शिवलिंग पर चढ़े हुए बेलपत्र को जल से धोकर फिर से अर्पित कर सकते हैं। बेलपत्र कभी बासी नहीं होता। यदि आपको नया बेलपत्र न मिले तो आप शिवलिंग पर चढ़े हुए बेलपत्र को जल से धोकर फिर से अर्पित कर सकते हैं। शिवलिंग पर 1, 3, 11, 21 या 108 बेलपत्र चढ़ा सकते हैं। बेलपत्र हमेशा 3 पत्तियों वाला ही होना चाहिए। आप बेलपत्र पर चंदन से ‘राम’ या ‘ॐ नमः शिवाय’ लिखकर भी शिवलिंग पर अर्पित कर सकते हैं।शिवलिंग पर 1, 3, 11, 21 या 108 बेलपत्र चढ़ा सकते हैं। बेलपत्र हमेशा 3 पत्तियों वाला ही होना चाहिए। आप बेलपत्र पर चंदन से ‘राम’ या ‘ॐ नमः शिवाय’ लिखकर भी शिवलिंग पर अर्पित कर सकते हैं।सोमवार के दिन बेलपत्र तोड़ने की मनाही होती है। सोमवार के साथ ही चतुर्थी, अष्टमी, नवमी, चतुर्दशी, अमावस्या और संक्रांति के दिन भी बेल पत्र नहीं तोड़ना चाहिए।सोमवार के दिन बेलपत्र तोड़ने की मनाही होती है। सोमवार के साथ ही चतुर्थी, अष्टमी, नवमी, चतुर्दशी, अमावस्या और संक्रांति के दिन भी बेल पत्र नहीं तोड़ना चाहिए।