हर आंख नम थी और माहौल बेहद भावुक हो गया। शावेद की मौत ने न सिर्फ उसके परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र को गहरे सदमे में डाल दिया

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रामपुर के युवक शावेद की रूस में गोली लगने से मौत हो गई। वह वहां सैनिक के रूप में काम कर रहा था। शावेद का शव जब गांव पहुंचा तो लोगों की आंखों से आंसू छलक पड़े। जानें शावेद, रूस कैसे पहुंचा था। यूपी के रामपुर जिले में शावेद का शव पहुंचने से माहौल गमगीन हो गया। दरअसल, मसवासी गांव के 22 साल के युवक शावेद की रूस में गोली लगने से मौत हो गई थी। शनिवार तड़के उसका शव दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचा, जहां से परिजन उसे लेकर गांव आए। शव के घर पहुंचते ही परिवार में कोहराम मच गया और पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई।
शावेद करीब 9 महीने पहले बेहतर कमाई की उम्मीद में रूस गया था। उसने घरवालों को बताया था कि वहां वह स्टील फर्नीचर बनाने का काम करेगा। शुरुआती दो महीनों तक उसने यही काम किया भी, जिससे परिवार को आर्थिक स्थिति सुधरने की उम्मीद जगी थी। लेकिन बाद में परिस्थितियां बदल गईं और उसे मजबूरी में रूस की सेना में शामिल होना पड़ा। इसी दौरान, वह गोलीबारी की चपेट में आ गया और उसकी मौत हो गई।शावेद अपने परिवार का इकलौता कमाने वाला सदस्य था। उसने इंटरमीडिएट तक पढ़ाई की और कम उम्र में ही घर की जिम्मेदारियां संभाल ली थीं। उसका छोटा भाई नावेद मानसिक रूप से अस्वस्थ है, जबकि बहन इंटरमीडिएट की पढ़ाई कर रही है। पिता दूल्हे हसन, दूध का छोटा कारोबार कर किसी तरह परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं। ऐसे में शावेद का विदेश जाना परिवार के लिए आर्थिक सहारा बनने की उम्मीद लेकर आया था, लेकिन उसकी असामयिक मौत ने सभी सपनों को चकनाचूर कर दिया।इस घटना का सबसे दुखद पहलू यह है कि शावेद की मौत 12 सितंबर 2025 को ही हो चुकी थी, लेकिन इसकी जानकारी परिवार को कई महीनों बाद मिली। परिजनों ने बताया कि 2 अप्रैल 2026 को एक फोन कॉल आया, जिसमें खुद को रूसी सेना का अधिकारी बताने वाले व्यक्ति ने शावेद की मौत की सूचना दी। इससे पहले परिवार लगातार उससे संपर्क करने की कोशिश करता रहा, लेकिन कोई जानकारी नहीं मिल सकी।शावेद के परिजनों ने 6 जनवरी 2026 को स्थानीय सांसद के माध्यम से भारत सरकार के विदेश मंत्रालय को पत्र भेजकर मदद की गुहार लगाई थी। हालांकि, उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला था। इसको लेकर परिजनों में नाराजगी भी देखी जा रही है। शनिवार को जब शावेद का पार्थिव शरीर गांव पहुंचा तो अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण एकत्र हो गए। हर आंख नम थी और माहौल बेहद भावुक हो गया। फिलहाल, शावेद की मौत ने न सिर्फ उसके परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र को गहरे सदमे में डाल दिया है।