हैदराबाद। मुख्यमंत्री श्री रेवंत रेड्डी ने कहा कि जीवन में पहला कदम रखने जा रहे विद्यार्थियों को कठिन परिश्रम कर पढ़ाई में आगे बढ़ना चाहिए ताकि वे न केवल अपने परिवार, गांव और राज्य बल्कि देश का नाम भी रोशन कर सकें।
मुख्यमंत्री बाबू जगजीवनराम भवन में तेलंगाना सोशल वेलफेयर गुरुकुल एजुकेशन सोसाइटी (TGSWREIS) द्वारा संचालित अनुसूचित जाति गुरुकुल विद्यालयों के छात्रों के लिए आयोजित सम्मान समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर IIT, NIT जैसी प्रतिष्ठित संस्थानों में प्रवेश पाने वाले, विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कक्षा 10वीं एवं इंटरमीडिएट के छात्रों को पुरस्कार प्रदान किए गए। साथ ही उत्कृष्ट परिणाम देने वाले गुरुकुल विद्यालयों को प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की गई।
कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष श्री गड्डम प्रसाद कुमार, उपमुख्यमंत्री श्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क के साथ मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों द्वारा तैयार चित्रकला प्रदर्शनी का उद्घाटन भी किया।
मुख्यमंत्री ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा, “हमारी सरकार सामाजिक समानता एवं समरस समाज के निर्माण के लिए कार्य कर रही है। गुरुकुलों में पढ़ने वाले बच्चे कल के भारत के कर्णधार बनेंगे। हम चाहते हैं कि ये बच्चे उच्च शिखर तक पहुंचे और तेलंगाना राज्य के पुनर्निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि तेलंगाना के पुरोधा सुरवर्म प्रताप रेड्डी के नाम पर तेलुगु विश्वविद्यालय, चाकली ऐलम्मा के नाम पर महिला महाविद्यालय और कोंडा लक्ष्मण बापूजी के नाम पर हैंडलूम टेक्नोलॉजी संस्थान स्थापित किए जा रहे हैं। साथ ही पं. नेहरू व डॉ. भीमराव अंबेडकर के सपनों को साकार करने की दिशा में भी सरकार लगातार कदम उठा रही है।
उन्होंने कहा कि मेहनत करने वाले ही इतिहास में अपना नाम दर्ज कराते हैं। उच्च शिखर तक पहुंचने के लिए पढ़ाई सबसे महत्वपूर्ण साधन है। उन्होंने विद्यार्थियों को समझाया कि 25 वर्ष की आयु तक कड़ी मेहनत कर पढ़ाई करें ताकि आगे का जीवन सम्मानजनक और गौरवपूर्ण बन सके। अगर विद्यार्थी गलत रास्ते पर गए तो माता-पिता को भी शर्मिंदा होना पड़ेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पहली बार 100 वर्षों के इतिहास में उस्मानिया विश्वविद्यालय को दलित कुलपति मिला है। इसी तरह राजीव गांधी यूनिवर्सिटी ऑफ नॉलेज टेक्नोलॉजी, उच्च शिक्षा परिषद के उपाध्यक्ष, राज्य निर्वाचन आयोग के आयुक्त, विधानसभा अध्यक्ष जैसे कई प्रमुख पदों पर भी दलित समुदाय के लोग पहुंचे हैं। उन्होंने यह सिद्ध किया है कि अवसर केवल जाति से नहीं, बल्कि शिक्षा से मिलते हैं।
उन्होंने कहा कि दलितों, आदिवासियों और कमजोर वर्गों को आत्महीनता का भाव त्यागना चाहिए। इसी सोच के तहत राज्य सरकार ‘यंग इंडिया इंटिग्रेटेड रेजिडेंशियल स्कूल्स’ की स्थापना कर रही है। गुरुकुलों के विद्यार्थियों में प्रतिभा है, आत्मविश्वास है, और वे भविष्य में अवश्य सफल होंगे। ये विद्यार्थी अपने परिवार ही नहीं, बल्कि पूरे गांव और देश का नाम रोशन करेंगे।
मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि “देश का भविष्य कक्षाओं में बैठा है। कठिन परिश्रम से ही सफलता मिलती है। आप सभी का उज्ज्वल भविष्य हो, राज्य प्रगति करे और हम हर कदम पर आपके साथ हैं।”
इस अवसर पर मंत्री श्री पोन्नम प्रभाकर, सलाहकार श्री वेम नरेंद्र रेड्डी, श्री शब्बीर अली, अनेक सांसद, विधायक, एमएलसी, वरिष्ठ अधिकारी, बड़ी संख्या में विद्यार्थी एवं उनके माता-पिता उपस्थित रहे।











