जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत तराना में स्थित प्राचीन बावड़ी का हो रहा है जीर्णोद्धार

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उज्जैन। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की मंशा के अनुरुप जिले में जल गंगा जल संवर्धन अभियान का योजनाबद्ध क्रियान्वयन किया जा रहा है। गौरतलब है की जल गंगा संवर्धन अभियान का उद्देश्य जन भागीदारी से जल संरक्षण और संवर्धन सुनिश्चित करना है। इस अभियान के अंतर्गत समाज की भागीदारी एवं विभिन्न सहभागी विभागों की समेकित पहल से मुख्यतः नवीन जल संग्रहण संरचनाओं के निर्माण, भू-जल संवर्धन, पूर्व से मौजूद जल संग्रहण संरचनाओं की साफ-सफाई व जीर्णोद्धार/मरम्मत, जल स्त्रोतों में प्रदूषण के स्तर को कम करने, जल वितरण की संरचनाओं की साफ-सफाई तथा मानसून में किये जाने वाले पौधारोपण हेतु आवश्यक तैयारियों के कार्य प्राथमिकता से किए जा रहे हैं।जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत जिले में स्थित प्राचीन जल के स्त्रोत- बावड़ी , कुए और कुंड की साफ-सफाई कर उनका जिर्णोध्दार किया जा रहा है। इसी कड़ी में जनपद पंचायत तराना की ग्राम पंचायत करंज में स्थित प्राचीन बावड़ी का भी अभियान के अंतर्गत कायाकल्प किया जा रहा है।

उल्लेखनीय है कि इस बावडी का निर्माण लगभग 150 वर्ष पूर्व करवाया गया था। उक्त निर्माण में किसी भी प्रकार के चूना, सीमेंट और केमीकल का उपयोग नहीं किया गया था। बावड़ी निर्माण में पत्थरों कि जमावट विशिष्ट तरीके से की गई है जिससे बावड़ी अपने मूल स्वरूप में आज भी स्थित है। बावडी का निर्माण करने के पीछे उद्देश्य ग्रामीणजनों और राहगीरों को पेयजल कि आपूर्ति करना था। बावडी के समीप ग्रामीणजन प्रमुख तीज-त्यौहारो पर एकत्रित होकर पूजा-पाठ करते हैं।

बावडी के जिर्णोंउध्दार के लिये इसमें 49 हजार रु की लागत से गाद निकालने और मुंडेर की मरम्मत का कार्य करवाया जा रहा है। अब तक बावड़ी से लगभग 52 क्विंटल गाद/मिट्टी/ कचरा निकाला जा चुका है। इसका जिर्णोंध्दार कार्य विगत 02 मई को प्रारंभ हुआ था। बावडी का जिर्णोंध्दार ग्राम पंचायत तराना के द्वारा किया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि बावडी के जिर्णोंध्दार से प्राचीन धरोहर के मूल स्वरूप में आने से आने वाली पीढी को पुरानी धरोहर के इतिहास को जानने का अवसर प्राप्त होगा साथ ही बावडी के आसपास साफ सफाई होने से ग्रामीणों की आस्था का केन्द्र भी पुन: स्थापित हो गया है।