लेखक – डॉ. राजीव कुर्रेले, आयुर्वेद विशेषज्ञ, एसोसिएट प्रोफेसर, उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय, हररावाला, देहरादून
देहरादून।आज की तेज़-तर्रार जीवनशैली, बाजारू खानपान और तनावपूर्ण दिनचर्या ने मोटापे की समस्या को एक महामारी का रूप दे दिया है। कम उम्र में बढ़ता वजन न केवल शरीर की सुंदरता को प्रभावित करता है, बल्कि कई गंभीर बीमारियों जैसे मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग और थायरॉयड का कारण भी बनता है। ऐसे में “माइंडफुल ईटिंग” यानी सजगता के साथ भोजन करने की आदत एक कारगर उपाय के रूप में सामने आई है।
माइंडफुल ईटिंग कोई नया चलन नहीं है, बल्कि भारतीय संस्कृति की वह धरोहर है जिसमें भोजन को “अन्नदेवता” का स्थान दिया गया है और कहा गया है – “यथा अन्नं तथा मनः” अर्थात जैसा भोजन, वैसा मन।
क्या है माइंडफुल ईटिंग?
माइंडफुल ईटिंग का अर्थ है – भोजन करते समय मन, इंद्रियां और आत्मा को पूर्ण रूप से उसी क्रिया में लगाना। इसका उद्देश्य न केवल भूख मिटाना होता है, बल्कि शरीर की आवश्यकता के अनुसार संतुलित भोजन करना होता है। इसमें यह समझा जाता है कि शरीर को वास्तव में कब और कितना भोजन चाहिए।
मोटापे से रक्षा में कैसे मददगार है?
माइंडफुल ईटिंग के ज़रिए व्यक्ति भावनात्मक भूख (Emotional Hunger) और शारीरिक भूख (Physical Hunger) में फर्क करना सीखता है। यह आदत अधिक खाने से रोकती है, भोजन को सही समय पर और सही मात्रा में ग्रहण करने की प्रेरणा देती है। धीरे-धीरे यह जीवनशैली में बदलाव लाती है और वजन नियंत्रित रहता है।
माइंडफुल ईटिंग के कुछ व्यावहारिक सूत्र
1. भोजन करते समय टीवी, मोबाइल या बातचीत से बचें।
2. हर निवाले को कम से कम 20-30 बार चबाएं।
3. भूख लगने पर ही भोजन करें, स्वाद के लालच में नहीं।
4. भोजन की गंध, रंग, बनावट और स्वाद को महसूस करें।
5. धीरे-धीरे खाएं और पेट भरने से थोड़ा पहले रुक जाएं।
6. जल्दी में या खड़े होकर खाना न खाएं।
माइंडफुल ईटिंग और आयुर्वेद
आयुर्वेद में अन्न को ‘ओज’ (ऊर्जा) का स्रोत माना गया है। आचार्य चरक के अनुसार – “भोजन वह औषधि है जो सही समय, मात्रा और विधि से लिया जाए।” माइंडफुल ईटिंग इसी सिद्धांत का आधुनिक रूप है। यदि व्यक्ति त्रिविध भूख – मानसिक, इंद्रियजन्य और शारीरिक भूख में अंतर समझकर भोजन करता है, तो वह कई रोगों से बच सकता है।
शुरुआत कैसे करें?
प्रारंभ में दिन का एक प्रमुख भोजन – जैसे रात का खाना – माइंडफुल ईटिंग के अनुसार करें। परिवार के सभी सदस्य एक साथ बैठकर बिना किसी विघ्न के भोजन करें। भोजन के बाद एक छोटा ध्यान (Meditation) सत्र भी जोड़ें, जिससे पाचन और मानसिक संतुलन बेहतर हो।
अन्य लाभ
पाचन शक्ति में सुधार
तनाव में कमी
नींद में वृद्धि
आत्म-संयम और मानसिक संतुलन
बच्चों और बुजुर्गों के लिए भी लाभदायक
बच्चों को प्रारंभ से ही भोजन करते समय सजग रहने की आदत डालनी चाहिए। बुजुर्गों के लिए यह आदत मधुमेह, हृदय रोग और मोटापे को नियंत्रित करने में बहुत सहायक है।
माइंडफुल ईटिंग और योग
यदि भोजन से पहले या बाद में कुछ मिनट का अनुलोम-विलोम, भ्रस्त्रिका या ध्यान किया जाए, तो भोजन न केवल शरीर बल्कि मन को भी पोषण देगा। यह संयोजन मोटापे से लड़ने का संपूर्ण उपाय है।
मोटापा एक लक्षण है, रोग नहीं। यह उस जीवनशैली का परिणाम है जिसमें व्यक्ति अपने शरीर और भोजन दोनों से दूरी बना लेता है। माइंडफुल ईटिंग उस दूरी को मिटाने का सहज उपाय है। यदि हर व्यक्ति सजग होकर खाए, तो मोटापा दूर रह सकता है और स्वास्थ्य समृद्ध हो सकता है।
लेखक परिचय:
डॉ. राजीव कुर्रेले, आयुर्वेद विशेषज्ञ एवं उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर हैं। स्वास्थ्य जागरूकता, योग और आयुर्वेद को जनमानस तक पहुंचाने के लिए निरंतर सक्रिय हैं।











