नई दिल्ली, 4 मई (PIB ब्यूरो):वेव्स 2025 शिखर सम्मेलन के तीसरे दिन भारतीय संगीत की समृद्ध विरासत और इसके वैश्विक भविष्य को लेकर एक प्रेरणादायक सत्र आयोजित किया गया। “भारतीय संगीत को नई ऊंचाइयों पर ले जाना” विषय पर केंद्रित इस सत्र में देश-विदेश के संगीत विशेषज्ञ, नीति-निर्माता और उद्योग जगत के दिग्गज शामिल हुए।
बॉलीवुड के लोकप्रिय संगीतकार और गायक हिमेश रेशमिया ने इस मौके पर कहा कि “वेव्स 2025 केवल एक सम्मेलन नहीं, बल्कि एक ऐसा शक्तिशाली मंच है जहाँ सहकर्मी और विषयवस्तु तैयार करने वाले एक साथ आकर भारतीय संगीत के भविष्य को दिशा दे सकते हैं।” उन्होंने उभरते कलाकारों को सलाह दी कि वे अपनी कला को गंभीरता से लें और हमेशा तैयार पोर्टफोलियो रखें, क्योंकि अवसर अब पहले से कहीं अधिक हैं।
रेशमिया ने इस बात पर बल दिया कि सोशल मीडिया जैसे प्लेटफॉर्म्स आज के कलाकारों को दुनिया के सामने आने का बेहतरीन मौका दे रहे हैं, लेकिन सफलता केवल उन्हीं को मिलती है जिनका संगीत “दिल से जुड़ता हो और कानों को सुकून देता हो।”
यूनिवर्सल म्यूज़िक के उपाध्यक्ष क्वे तियांग ने भारत को “भविष्य का संगीत हब” बताते हुए कहा कि भारतीय प्रतिभा में वैश्विक अपील है, जिसे रणनीतिक ढंग से सामने लाने की जरूरत है।
आईएफपीआई के तकनीकी प्रमुख डॉ. रिचर्ड गूच ने बताया कि संगीत का डेटा-संचालित भविष्य कैसा दिखेगा और किस तरह कॉपीराइट संरक्षण से भारतीय रचनाकारों को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर न्याय मिल सकता है।
सोनी म्यूज़िक पब्लिशिंग के दिनराज शेट्टी ने संगीतकारों के लिए स्ट्रीमिंग युग में रॉयल्टी और कमाई के अवसरों की जानकारी दी।
सारेगामा इंडिया के प्रबंध निदेशक विक्रम मेहरा ने स्पष्ट किया कि संगीत उद्योग की सफलता कलाकारों और लेबल दोनों के सम्मान और सहयोग से ही संभव है। उन्होंने पाइरेसी के खिलाफ सख्त कार्रवाई और सरकार की स्पष्ट नीतियों की जरूरत को रेखांकित किया।
वार्नर म्यूज़िक इंडिया के प्रमुख जय मेहता ने बताया कि भले ही भारत की अर्थव्यवस्था तेज़ी से बढ़ रही हो, संगीत उद्योग अभी भी अपनी पूरी क्षमता तक नहीं पहुंचा है। उन्होंने कहा, “जब तक सामग्री उच्च गुणवत्ता की नहीं होगी, उपभोक्ता भुगतान नहीं करेंगे।”
नीति विश्लेषक फर्नांडीस ने एक स्पष्ट आर्थिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हुए डिजिटल नवाचार, अधिकार संरचना और पारदर्शी कानूनी ढांचे की आवश्यकता बताई।
इस सत्र का संचालन वैश्विक संगीत सलाहकार स्कॉट डी मर्काडो ने किया, जिन्होंने हर वक्ता से उनके दृष्टिकोण को सामने लाने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने रचनाकारों को उद्योग का “केंद्रीय स्तंभ” बताते हुए कहा कि अब समय आ गया है जब संगीत की रीढ़ – कलाकारों – को पूरा समर्थन और संरचना प्रदान की जाए।
वेव्स 2025 न केवल भारतीय संगीत की वर्तमान स्थिति का प्रतिबिंब था, बल्कि इसके भविष्य की नींव भी रखता दिखा। यह स्पष्ट हो गया कि यदि नीति, प्लेटफॉर्म और गुणवत्ता का सही संगम हो, तो भारतीय संगीत केवल देश ही नहीं, पूरी दुनिया में अपनी गूंज छोड़ सकता है।











